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लुभा रहा स्वरूप

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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लुभा रहा स्वरूप, दिव्य रूप मैं निहारती,
तुम्हें करूँ प्रणाम, हाथ जोड़ मात भारती।

कलुष हृदय में राज करे, आप दूर कीजिए,
दरिद्र दीन-हीन हूँ, दया का दान दीजिए
आप हो दयालु दीन, कष्ट सारे काटतीं,
तुम्हें करूँ प्रणाम, हाथ जोड़ मात भारती।

सरस्वती कृपा सदैव, आप ऐसी कीजिए,
दिव्य ज्ञान, छंद, वर्ण, शब्द, भाव दीजिए
लिखूँ समाज के लिए, समाज को सुधारती,
तुम्हें करूँ प्रणाम, हाथ जोड़ मात भारती।

बहे सदैव प्रेम गंग, आप शरण लीजिए,
ज्ञान का बढ़े प्रवाह, बुद्धि धार दीजिए
अनवरत ये लेखनी, नवीन भाव खोजती,
तुम्हें करूँ प्रणाम, हाथ जोड़ मात भारती।

सृजन मेरा नवीन हो, दिव्य चक्षु दीजिए,
राग ताल सुर की स्त्रोत आप शरण लीजिए
हे हंसवाहिनी सदा सुधा सरस प्रवाहती,
तुम्हें करूँ प्रणाम, हाथ जोड़ मात भारती॥