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सुख का सागर ‘राम’

अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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रामनवमी विशेष…

‘राम’,
छवि मनोहारी
सुख का सागर,
करते कृपा
‘राम’।

‘राम’,
अपार धैर्यवान
मर्यादा पुरुषोत्तम-त्यागी,
जगत पिता
‘राम’।

‘राम’
कर्मशील मानव
राजा मानव कल्याण,
जग अभिलाषी
‘राम’।

‘राम’
प्रेम फैलाया
झूठे बेर खाए,
सिखाया धर्म
‘राम’।

‘राम’
सदा आज्ञाकारी
हर पल मुस्कान,
अद्भुत योद्धा
‘राम’।

‘राम’
सदमार्ग दिखाया
सदा कल्याण किया,
निराली महिमा
‘राम’।

‘राम’
सबके प्रभु
हृदय बसे हनुमान
वचन पक्का
‘राम’।

‘राम’
महिमा निराली
करे जो स्मरण,
तर जाए
‘राम’।

‘राम’
सदा विनम्र
चरण धोकर केवट,
शरण पाए
‘राम’।

‘राम’
चरण रज
पद पत्थर अहिल्या
बना दिया
‘राम’।

‘राम’
भक्ति करो
नाम जपते-जपते,
वरदान मोक्ष
‘राम’।

‘राम’
महिमा अपरम्पार
वर्णन बड़ा कठिन
तैरे पत्थर,
‘राम’।

‘राम’
अंतिम सत्य
सच्ची भक्ति करो,
निश्चित दर्शन
‘राम’।

‘राम’
सदा साथ
सुनते भक्त पुकार
आदर्श राजा
‘राम’।

‘राम’
सर्वत्र व्याप्त
सदा रखो आस्था,
हरेंगे कष्ट
‘राम’।

‘राम’
सदा अनुकरणीय
समझो पद संकेत,
बनो इंसान
‘राम’॥