अरमां जगा दीजिए

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ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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रुलाया है तो,
हँसा भी दीजिए
दिल में छिपा वो राज,
अब बता भी दीजिए।

मजाक किया था,
ये तो तय है
सहन करना,
अब सिखा भी दीजिए।

प्रेम किया है,
गुनाह बिल्कुल नहीं
दिल के अरमां,
अब जगा भी दीजिए।

अच्छी लगती है,
शायरी तुम्हारी
मीठी सी ग़ज़ल,
अब सुना भी दीजिए।

काँटे बहुत है,
उल्फत की राहों में
पुष्प की सेज,
अब बिछा भी दीजिए।

पतझड़ हो गया है,
जीवन में मेरे।
प्रेम की बगिया,
अब लगा भी दीजिए॥

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।

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