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अलग अंदाज ने बनाया आवाज़ की दुनिया की मलिका

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)…

जब हिंदी फिल्मों में महान विभूतियों का दौर था, गीत-संगीत गायन में एक से बढ़कर एक उदाहरण श्रेष्ठता की पायदान पर थे। ऐसे समय आशा भोसले को बड़ी बहन की परछाईं माना जाता था। तब उन्होंने अपने अंदर छुपी प्रतिभा और अद्भुत क्षमता को जगजाहिर किया। आशा भोसले ने अपनी मेहनत व लगन से जो मुकाम हासिल किया, वह हर किसी के बस की बात नहीं है। यही कारण रहा कि अपनी गायकी के अलग अंदाज के कारण उन्हें संगीत की दुनिया की मलिका बनाया गया। आशा वह है जो ‘निराशा’ में नहीं रहीं। जिनके गाए गीतों में ऐसी आवाज़ रही, जिसने लोगों को गुनगुनाने के लिए मजबूर कर दिया। जैसे ‘इन आँखों की मस्ती के…’ गीत के हजारों प्रशंसक रहे। उन्होंने अपनी ज़िंदगी में ना जाने कितने दुखों का सहा, पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन सभी से सीख लेते हुए कुछ अलग प्रस्तुत किया। जैसे ‘पिया तू, अब तो आजा’ गीत में कैबरे डांस पर अभिनेत्री हेलन के अभिनय की आवाज आशा ताई ही बनी। रोमांटिक गानों में ‘ओ मेरे सोना रे…’ गीत आज भी जवां है और सदियों तक इसी तरह सुना जाता रहेगा। किशोर कुमार व आशा भोसले की जोड़ी का हर एक युगल गीत हर समय हर मौसम में नयापन ही देता है, जैसे ‘कह दूं तुम्हें, या चुप रहूं…, वहीं नकारात्मक किरदारों के लिए भी बहुत मस्त गीत गाएं, जैसे ‘आओ ना, गले लगाओ ना…।’ पति को परमेश्वर मानने वाली औरत के लिए ‘सजना है मुझे सजना के लिए, गाया तो ठुमरी, दादरा के बाद बिल्कुल अलग गाना ‘मुझे नौलखा मंगा दे रे…’ भी गाया, जिसे सुनकर एक अलग एहसास होता है। पुराने दौर की बात हो या फिर नई नायिकाओं के लिए, उन्होंने नयी पीढ़ी के लिए ‘ले गई ले गई’ या फिर ‘हो जा रंगीला रे..’ के बाद भी अठखेलियाँ भरा गीत जैसे ‘ढल गया दिन, हो गई शाम जाने दो जाना है…।’ या फिर ज़ीनत अमान पर फिल्माया गीत ‘दम मारो दम, मिट जाएं गम, बोलो सुबह-शाम हरे कृष्ण हरे राम।’ से भी सबको लुभाया। श्रोता उनके बहुत प्रशंसक थे, सुनने वाले इस गायिका को बहुत सम्मान देते थे। यही उनका रंग था, जो सतरंगी आसमान में हमेशा चमकेगा रहेगा।
पुराने गीतों में ‘आओ हुजूर तुम्हें सितारों में लें चलूँ’ जैसे जबरदस्त गीतों की हसीन आवाज़ की मलिका ने इतना गाया कि लोग दांतों तले उंगलियाँ दबा लेते हैं।
आशा भोसले ने उत्तर प्रदेश के एक शहर को इतना प्रसिद्ध किया कि ‘झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में’ गाने ने धूम मचा दी थी। आशा ताई की आवाज हर एक नई पुरानी अभिनेत्री को अपनी लगती थी। ग्रामोफोन का जमाना हो या फिर कैसेट्स का, आशा जी की आवाज को इस दौर के यू-ट्यूब के श्रोता भी बड़ी ईमानदारी से सुनते हैं। आप अब इस दुनिया में नहीं हो, लेकिन आप की आवाज़ को पूरी दुनिया में कभी भी विराम नहीं लग सकता है, क्योंकि दूसरी आशा भोसले अब नहीं हो सकती है।