स्वयं बदलें और भारत को शिखर तक पहुँचाएँ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भारतीय संस्कृति में सावन केवल वर्षा ऋतु का एक महीना नहीं, बल्कि प्रकृति, अध्यात्म, प्रेम, लोकजीवन, त्याग और नवसृजन का उत्सव है। सावन आते ही धरती हरित वस्त्र धारण करती है, आकाश मेघों से भर जाता है और रिमझिम वर्षा जीवन में नई उमंग भर देती है। इसी सावन … Read more

परहित सरस धर्म नहीं भाई…

राधा गोयलनई दिल्ली************************************** किसी ने कहा है-इंसान बनो, कर लो भलाई का कोई काम दुनिया से चले जाओगे, रह जाएगा बस नाम।    लाखों लोग यहाँ शान अपनी दिखाते हुए आए थे। सोचा था कि दुनिया को अपनी मुट्ठी में कैद कर लेंगे, सब पर अपनी धाक जमा लेंगे, दुनिया की सारी दौलत हमारी है… लेकिन हुआ … Read more

जातिगत आरक्षण से आगे आवश्यकता आधारित न्याय का समय

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************* भारत का संविधान समानता, सामाजिक न्याय और अवसरों की समान उपलब्धता के सिद्धांत पर आधारित है। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश के निर्माताओं ने यह स्वीकार किया, कि सदियों से सामाजिक भेदभाव और अस्पृश्यता का सामना करने वाले समुदायों को मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष संवैधानिक प्रावधान आवश्यक हैं। इसी … Read more

‘गलती’ पीठ की तरह

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)******************************************* सतरंगी दुनिया -३५… अच्छे जरूर बनें, परन्तु जरूरत से ज्यादा नहीं। अगर ज्यादा अच्छे बनेंगे तो नीम्बू की तरह निचोड़ दिए जाओगे। याद रखिए, जहां से छल शुरू होता है, वहां से महाभारत शुरू होती है। जो चीज मन की शांति को छीन ले-उसे छोड़ देना ही समझदारी है; … Read more

संसद को ठप कर देना उचित नहीं

ललित गर्गदिल्ली*******************************     भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी संसद है। यही वह सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है जहां राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य से जुड़े विषयों पर गंभीर विमर्श होता है, सरकार जवाबदेह बनती है, विपक्ष जनभावनाओं को स्वर देता है और कानूनों के माध्यम से देश के विकास की दिशा तय होती है, … Read more

पीओके की पुकार और दुनिया की जिम्मेदारी

ललित गर्गदिल्ली******************************* पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में इन दिनों जो परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं, वे केवल एक चुनावी प्रक्रिया की कहानी नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र, मानवाधिकार और जनविश्वास के गहरे संकट की दास्तान हैं। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक शक्ति निष्पक्ष चुनाव, नागरिक स्वतंत्रता और शासन की जवाबदेही में निहित होती है, लेकिन … Read more

पीएसपी प्रभाग द्वारा भर्तियों में भाषाई भेदभाव के विरुद्ध याचिका

सेवा में,विदेश मंत्रालय,दक्षिण ब्लॉक, केंद्रीय सचिवालय,नई दिल्ली – ११००११ विषय:-पीएसपी प्रभाग, विदेश मंत्रालय द्वारा राजभाषा अधिनियम, १९६३ एवं राजभाषा नियमों का लगातार उल्लंघन। महोदय,   विदेश मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पीएसपी प्रभाग द्वारा पिछले कई वर्षों से राजभाषा अधिनियम १९६३ और राजभाषा नियमों की अवहेलना करते हुए केवल अंग्रेजी में पत्र जारी किए जा रहे … Read more

जबान पर नियंत्रण रखिए

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)******************************************** सतरंगी दुनिया – ३४… यदि इंसान शिक्षा से पहले संस्कार, व्यापार से पहले व्यवहार, भगवान से पहले माता-पिता को पहचान ले हो तो ज़िंदगी में कभी कोई कठिनाई आ ही नहीं सकती। हैसियत का परिचय हमें तब देना चाहिए, जब बात आत्म सम्मान की हो। अन्यथा सादगी ही सबसे … Read more

राष्ट्रभाषा हिंदी के लिए संपूर्ण जीवन होम किया ‘दादा’ ने

डॉ. विकास दवेइंदौर (मध्यप्रदेश )************************************************* प्रसंगवश:कैलाशचंद्र पंत…. यह हम सबका सौभाग्य था, कि मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति और हिंदी भवन न्यास को अनेक वर्षों से पूज्य दादा पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत का सानिध्य और स्नेहाशीश प्राप्त होता रहा। लगभग ४० वर्ष की अनथक तपस्या का पर्याय है हिंदी भवन न्यास और इस गंगा से … Read more

हिंदी भाषा की रक्षा और समृद्धि का जीवंत उदाहरण

संदीप ‘सृजन’उज्जैन (मध्यप्रदेश)********************************************* प्रसंगवश:कैलाशचंद्र पंत… जब कोई महान व्यक्तित्व इस संसार से विदा होता है, तब केवल एक जीवन का अंत नहीं होता, बल्कि एक युग की स्मृतियाँ, एक विचारधारा की जीवंत परंपरा और एक सांस्कृतिक चेतना का विराट अध्याय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाता है। पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत का निधन हिंदी साहित्य, पत्रकारिता, … Read more