हिंदी के बढ़ते कदम से बेहतर उम्मीद

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** हिंदी दुनिया में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी दिवस भारतीय दूतावासों और विदेशों में स्थित शैक्षणिक संस्थानों में विशेष रूप से मनाया जाता है, ताकि गैर हिंदी भाषियों को हिंदी भाषा के साथ जोड़ा जा सके। ‘विश्व हिंदी दिवस’ हमें अपनी भाषाई जड़ों पर गर्व करने और वैश्विक मंच … Read more

तारीफ की अहंकारिता… बचिए

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)**************************************** हम अक्सर महसूस नहीं करते हैं, पर तारीफ़ में भी अहंकार छिपा होता है। हम अक्सर यह सोच कर खुश हो जाते हैं कि हमें तारीफ मिली है, पर हर तारीफ अच्छी तारीफ नहीं होती। उसके पीछे कहीं न कहीं एक झूठ छिपा होता है। तारीफ सुनने की चाहत कहीं न कहीं … Read more

गधे कभी दौड़ का हिस्सा नहीं बनते…

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)****************************************** सतरंगी दुनिया-३९…. हाथ उसी का पकड़िए, जो आपका साथ कभी ना छोड़े, जैसे ‘बिजली का तार।’ अजीब है ये दुनिया- यहाँ बाल सफ़ेद करने में ज़िंदगी निकल जाती है और काले बाल तो आधे घंटे में सफ़ेद हो जाते हैं।कौन अपना है ?, कौन पराया ? यदि आपको परखना … Read more

यूपीआई शुल्कःबाजार की कमाई से अधिक महत्वपूर्ण ’उपभोक्ता विश्वास’

ललित गर्गदिल्ली***************************** भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में यूपीआई केवल भुगतान का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि वह रोजमर्रा के आर्थिक व्यवहार का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सब्जी वाले से लेकर बड़े कारोबारी तक, टैक्सी से लेकर ऑनलाइन खरीददारी तक और घरेलू लेन-देन से लेकर व्यावसायिक भुगतान तक-यूपीआई ने पैसे के लेन-देन की आदत, … Read more

सीधे दिल में उतरता है ‘हाउस हसबैंड’

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)************************************** सुरजीत मान जलईया सिंह द्वारा रचित उपन्यास ‘हाउस हसबैंड’ (श्वेतवर्णा प्रकाशन) जिसका नाम सुनते ही मन में उसे पढ़ने की जिज्ञासा मन में भर आई, जिस उपन्यास का शीर्षक ही एक नये विषय के केन्द्र के इर्द-गिर्द बुना हो और वह जिस सहजता से एक चित्र हमारे सामने खींचता है, वह वर्तमान … Read more

क्या ‘कृत्रिम मेधा’ मानव के नियंत्रण से बाहर होगी ?

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** ‘कृत्रिम मेधा’ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से विकास किया है, उसने मानव समाज के सामने एक ऐसा प्रश्न खड़ा कर दिया है, जिसका उत्तर देना अब केवल वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी नहीं रह गया है। सवाल है—क्या कृत्रिम मेधा एक दिन मानव के नियंत्रण से बाहर निकल … Read more

दुनियादारी

राधा गोयलनई दिल्ली************************************ ‘दयाहीनं निष्फलं स्यान्नास्ति धर्मस्तु तत्र ही।ऐते वेदा अवेदा: स्युर्दया यत्र न विद्यते॥’  यानी बिना दया के किए गए काम में कोई फल नहीं मिलता। ऐसे काम में धर्म नहीं होता। जहाँ दया नहीं होती, वहाँ वेद भी अवैध हो जाते हैं। इसी सोच और संकल्प के साथ राजकोट से २२२२ किलोमीटर दूर … Read more

विवाह क्यों नहीं करना चाहते आज के युवा ?

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** पिछले एक दशक में भारत में विवाह को लेकर जो आंकड़े आए हैं, वे व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि बड़े प्रामाणिक शोधों पर आधारित हैं। पहला बड़ा शोध यूजीओवीटी-एम आईएनटी-सीपीआर मिलेनियल सर्वे है, जिसमें २० से ३५ साल के ७३९८ युवाओं से बात की गई। इस सर्वे ने बताया कि हर ४ … Read more

हिंदी दिवस’:जब तक रोग का सही इलाज नहीं होगा, कुछ नहीं बदलेगा

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************* विश्व में जितनी संस्थाएं हिंदी की सेवा के लिए बनी हुई हैं, उतनी संस्थाएँ किसी अन्य भाषा के लिए नहीं हैं। जितने संवैधानिक प्रावधान, अधिनियम, नियम आदि और संसदीय समिति सहित तरह-तरह की समितियां, संगठन और हिंदी के विकास व प्रसार के लिए संघ सरकार और विभिन्न राज्यों में भाषा के लिए पूरे … Read more

भ्रष्टाचार मुक्त भारत तक पसरी चुनौतियाँ

ललित गर्गदिल्ली***************************** भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सबसे खतरनाक क्षण वह नहीं होता जब कोई व्यक्ति चोरी करता है, बल्कि वह होता है जब समाज चोरी को सामान्य मानने लगता है। जब रिश्वत को ‘सुविधा शुल्क’, कमीशन को ‘व्यवस्था’, राजनीतिक पहुंच को ‘सिफारिश’ और नियम तोड़ने को ‘काम निकालने की कला’ कहा जाने लगे, तब … Read more