अगर ये  पंछी न होते तो…

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* पूर्वांचल पर भोर की लालिमा धूमिल हुई, तब उजियारे की नई आभा लेकर सूरज की कोर उभरने लगी है। भीषण गर्मी के दिन हैं, फिर भी सुबह की ठंडी हवा के झोंके कुछ यूँ छू रहे हैं, जिससे तन-मन प्रसन्न हुआ जा रहा है।   सामने इमली के पेड़ों में छिपकर एक भरद्वाज का … Read more

अजीब है दुनिया

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** सतरंगी दुनिया-२१… अपनी ज़िंदगी को खुली किताब मत बनाइए, क्योंकि लोगों को पढ़ने में नहीं, बल्कि पन्ने फाड़ने में मजा आता है। खिचड़ी की विशेषता देखिए- अगर बर्तन में पकती है तो बीमार को ठीक कर देती है और दिमाग में पके तो इंसान को बीमार कर देती है।  … Read more

वास्तविक खुशी दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने में

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मन कुछ कहता है…(‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… हर मनुष्य की अपनी-अपनी इच्छाएँ होती हैं। वह अपनी इच्छाओं को समाज में साकार होते देखना चाहता है और उनकी पूर्ति के लिए हर संभव प्रयास करता है। इच्छाएँ केवल व्यक्तिगत नहीं होतीं, बल्कि सामाजिक भी होती हैं। एक व्यक्ति की सकारात्मक इच्छाएँ समाज … Read more

नींव का पत्थर

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** मजदूर दिवस विशेष…. खाली सड़क पर उसकी साइकिल हवा से बातें कर रही थी। एक धीरे चल रहे स्कूटर से जब वह आगे निकला, तो उसके चेहरे पर चमक आ गई और पाँव जैसे मशीन बन गए।“धीरे चलाओ… कहीं हम दोनों गिर गए तो ?”“चिंता मत कर…. मैं चोट खा … Read more

मजदूर, मशीन और मर्म का मंथन

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** ‘मजदूर दिवस’ विशेष…. ‘मजदूर दिवस’ बीत गया—एक ऐसा दिन, जब मंचों पर श्रम की महत्ता के गीत गाए गए, भाषणों में गरीब, किसान और मजदूर वर्ग को राष्ट्र की रीढ़ बताया गया और  संवेदनाओं के शब्दों से वातावरण भर दिया गया। सरकारी सभागारों से लेकर निजी संस्थानों तक, हर जगह श्रम … Read more

हिंदी पत्रकारिता के २०० वर्षों की समृद्ध संग्रामगाथा

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** हिंदी पत्रकारिता की दो सौ वर्षों की यात्रा केवल एक भाषाई या संचार माध्यम का विकास नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज, उसकी चेतना, उसके संघर्षों और उसके लोकतांत्रिक विकास की गहरी और बहुआयामी कथा है। १८२६ में कलकत्ता से प्रकाशित ‘उदन्त मार्तण्ड’ से आरंभ हुई यह परंपरा उस समय की … Read more

आशा, करुणा और मानवीय मूल्यों के पुनर्जागरण का अवसर

ललित गर्गदिल्ली*********************************** ‘विश्व इच्छा दिवस’ (२९ अप्रैल) विशेष…. हर वर्ष २९ अप्रैल को मनाया जाने ‘विश्व इच्छा दिवस’ मानवता के उन कोमल स्पंदनों को अभिव्यक्त करता है, जो हमें एक-दूसरे से जोड़ते हैं। यह संवेदनशीलता, करुणा और आशा का वैश्विक अभियान है। इस दिन का मूल उद्देश्य उन बच्चों के जीवन में खुशी और सकारात्मक … Read more

पत्नी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** रात के ११ बज गए थे। गायत्री किचन में बर्तन धो रही थी, महिम अपने बिस्तर पर लेटा हुआ करवटें बदल रहा था।   वह मन ही मन में सोच रहा था, कि मेरी पत्नी को कितनी मेहनत करनी पड़ती है। सुबह के ५ बजे की उठी हुई अभी भी लगी हुई है। बेचारी … Read more

प्रेम-भावनाओं का केंद्र बिंदु ईश्वर ही

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ‘प्रेम’ भावनाओं का केंद्र बिंदु है। ईश्वर भावनाओं से ही प्राप्त होते हैं। ईश्वर धन, दौलत और सम्पत्ति से प्रसन्न नहीं होते; धन-दौलत से अहंकार उत्पन्न होता है, और अहंकार ईश्वर को अप्रिय है।यह विचारणीय प्रश्न है, कि प्रेम कैसे प्राप्त हो। प्रेम में हार-जीत नहीं होती, केवल प्रेम होता है। … Read more

बमों की बौछार-बातों की बाज़ीगरी से वैश्विक व्यवस्था पर प्रहार

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** २८ फरवरी २०२६ की रात जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए, तो यह पूरी वैश्विक व्यवस्था के लिए भूकंप था। हमले ईरानी सैन्य और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए, जिनमें सर्वोच्च नेता अली खामनेई और अन्य ईरानी अधिकारी मारे गए, और बड़ी संख्या … Read more