घड़ियाली आँसू बहाना छोड़िए

राधा गोयलनई दिल्ली************************************ जन-मन का भाव हिन्दी (हिन्दी दिवस विशेष)… मेरा कहना है कि अपनी संस्कृति और संस्कारों को जब हम स्वयं अपने जीवन और लोक व्यवहार में नहीं ला पा रहे हों, और उस पर भी पश्चिमी खुलेपन के लिए लाल कालीन बिछाने के बाद यह अपेक्षा करना कि हमारी नई पीढ़ी उस आकर्षण … Read more

हिंदुस्तान में हिंदी

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )********************************************* जन मन का भाव हिन्दी (हिन्दी दिवस विशेष)… हमारे देश के विभिन्न राज्य में भिन्न-भिन्न भाषाएं बोली जाती है, जैसे गुजरात में गुजराती, राजस्थान में मारवाड़ी, पंजाब में पंजाबी, महाराष्ट्र में मराठी, दक्षिण भारत में तेलुगू, मलयालम, कन्नड़, पूर्वोत्तर भारत में असमिया, बोडो, मणिपुरी, बंगाली आदि भाषाएं बोली जाती है। … Read more

हिंदी:वर्तमान स्थिति पर चिंतन जरूरी

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)************************************* हिन्दी दिवस (१४ सितम्बर) विशेष…    भारत के लिए उसके जन-सम्पर्क की भाषा यानी हिन्दी आज़ादी के ७९ वर्ष बाद भी उपेक्षा का शिकार है, क्योंकि इसे वह अधिकृत स्थान नहीं मिला है, जो कभी से दे दिया जाना था। हिंदी, जो संविधान की राजभाषा है और देश की सबसे बड़ी … Read more

कभी अस्त नहीं होता हिन्दी का सूर्य

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** हिन्दी दिवस (१४ सितम्बर) विशेष… भाषा सिर्फ शब्दों का समूह नहीं होती, भाषा एक सभ्यता की आत्मा होती है और जब हम हिंदी की बात करते हैं तो हम सिर्फ एक भाषा की बात नहीं करते, जीवंत सभ्यता की बात करते हैं जो आज दुनिया के हर कोने में साँस ले … Read more

महादेवी जी में वेदना है, पर मीरा जैसा उद्दाम प्रेम प्रवाह नहीं

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** आधुनिक मीरा ‘महादेवी वर्मा’ (पुण्यतिथि विशेष)… महादेवी वर्मा को आधुनिक मीरा कहना तर्कसंगत है या नहीं, इस पर गहन रूप से विचार करना होगा, क्योंकि केवल एकांगी साम्य को देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं लगता।      जब हम मीरा बाई और महादेवी वर्मा की वेदना, दर्द के उद्गम स्त्रोत या उनके स्वरूप पर विचार … Read more

प्रकृति संरक्षण में मेरा योगदान

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)******************************* प्रकृति हमारी माँ के समान है और हमें जीने के लिए बहुत कुछ दिया है। हमें साँस लेने के लिए शुद्ध हवा, पीने के लिए पानी, भोजन के लिए फल और अनाज तथा रहने के लिए भूमि और घर मिले हैं।पेड़-पौधे, नदियाँ, पहाड़, पशु-पक्षी और अनेक प्राकृतिक संसाधन हमारे जीवन का … Read more

पर्युषण महापर्व:आत्मशुद्धि और मधुरता का अवसर

ललित गर्गदिल्ली***************************** पर्युषण पर्व (१४ सितम्बर) विशेष… जैन धर्म का प्रमुख आध्यात्मिक महाकुंभ पर्युषण महापर्व इन दिनों देशभर में त्याग, तपस्या, संयम, साधना और आत्मचिंतन के साथ मनाया जा रहा है। यह केवल ८ दिन तक चलने वाला धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा को जगाने, जीवन को परिष्कृत करने और संबंधों को मधुर बनाने का … Read more

हर मोड़ पर हम शिक्षक और छात्र भी

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** मेरे भाग्य विधाता (शिक्षक दिवस विशेष )… भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। पारंपरिक रूप से ‘शिक्षक’ शब्द सुनते ही कक्षा की दीवार पर लगा ब्लैकबोर्ड और उस पर चॉक से लिखती हुई किसी शिक्षिका या शिक्षक का चेहरा आँखों के समक्ष उभर आता है।  शिक्षक दिवस भी हम … Read more

कला, साहित्य और विद्यार्थी बनाम शिक्षक एवं पाठशाला

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )********************************************** मेरे भाग्य विधाता (शिक्षक दिवस विशेष )… भारतीय हिंदू धर्म और संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत गुरुकुल में ६४ कलाएं सिखाई जाती थी। वर्तमान समय में हम समझें और जानें भी कि ये कलाएं हमारे जीवन के हर पहलू से जुड़ी थी, जिनका हमारे जन्म से लेकर मृत्यु तक … Read more

कुछ खट्टी-मीठी यादों के साथ श्रद्धासुमन

राधा गोयलनई दिल्ली************************************ मेरे भाग्य विधाता (शिक्षक दिवस विशेष )… हम भारतीयों के जीवन में गुरु का बहुत महत्व है। गुरु हमें उचित अनुचित का बोध कराते हैं। हर प्रकार की विधा में पारंगत करते हैं- फिर चाहे वो शस्त्र ज्ञान हो या शास्त्र ज्ञान। हमारे जीवन की लघुता को खत्म करके गुरुता से ऊर्जावान … Read more