हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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‘हनुमान जयंती’ विशेष…
हर युग में भक्ति का परिचय जिन्होंने दिया, वह सरल-सौम्य जिनका कोई तोड़ विश्व में नहीं है, वह राम भक्त हनुमान हैं; जिनके हृदय में राम, लक्ष्मण व जानकी माता हरदम रहते हैं। आत्मशक्ति का वह अनूठा नाम राम भक्त हनुमान है। ‘जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तीनों लोक उजागर’ समर्पण के हर एक पहलू व भाव में सच्ची भक्ति, मेहनत, लगन और उस पर हम प्रभु में श्रद्धा भाव रखते हुए हनुमान जैसी शक्ति व भक्ति प्राप्त कर सकते हैं। तभी तो हनुमान जी ‘अष्टसिद्धि नव निधि के दाता’ बने हैं। आज भी भटके हुए प्राणियों को राम और हनुमान जी राह दिखा रहे हैं। जहां-जहां राम धुन व राम नाम का गुणगान होता है, वहाँ वीर हनुमान अपना आशीर्वाद सदैव देते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम राजा रामचंद्र जी ने जिस प्रकार मर्यादा में रहकर मनुष्य रूप में निर्भय होकर धर्म व कर्म किया, उन्हीं के शुद्ध भाव का अनुकरण करते हुए बजरंगबली वीर हनुमान ने भी नवधाभक्ति के हर रुप में अपने- आपको लगा दिया था। इसलिए युगों-युगों से वह धरती पर व प्रभु राम की भक्ति के रूप में हमारे हृदय में बसें रहेंगे, क्योंकि उनके हृदय में भी प्रभु राम बसे हैं।
हनुमान जी की क्षमता उनकी भक्ति का सबसे बड़ा रूप है। जिनके मन में कपट रहित नि:स्वार्थ सेवा भक्ति हो, जो नौ निधियों के दाता हो, वह धर्म ध्वजा लेकर हम सभी को सदा सच्चा मार्ग दिखाते रहेंगे। संसार के मंगल के लिए उनका हर कार्य और उनकी शक्ति का प्रताप हम सभी के लिए शुभ है।
अपने प्रभु राम पर विश्वास ही उनके लिए चिरंजीवी होने का फल रहा था। श्रद्धा व स्नेह के साथ अटूट शुद्ध अंतर्मन से जो अपना सब-कुछ अपने प्रभु को समर्पित करते हैं, उन्हें कभी भी प्रभु राम मझधार में अकेले नहीं छोड़ते हैं। हनुमान जी की उसी आत्मशक्ति व विश्वास ने उन्हें महाबली हनुमान बनाया।
लंका में रावण को मार कर युद्ध में हरा देने के बाद प्रभु राम अयोध्या आए, राम दरबार सजाया और सभी सहयोगी मित्रों को पुरस्कृत किया। इसी बीच प्रभु राम ने सीता माता को कहा कि हनुमान जी का भी सम्मान करना है। सीता माता श्रृंगार कर रही थी और अपनी मांग में सिंदूर लगा रही थी। हनुमान जी ने सैनिक से पूछा कि “यह माता सिर में क्या लगा रहीं हैं ?” सैनिक बोला, “हनुमान जी यह सिंदूर लगा रही हैं, जिससे उनके पति परमेश्वर की लम्बी उम्र हो और रक्षा भी हो।” “अच्छा सिंदूर इतना चमत्कारी है।” तब हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर में सिंदूर लगा लिया। जब उनसे पूछा गया “आपने अपने पूरे शरीर में यह सिंदूर क्यों लगा लिया ?”
वो बोले, “जब एक चुटकी सिंदूर सीता माता अपने पति मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की लम्बी उम्र के लिए लगा सकतीं हैं तो मेरे तो तन-मन में, रोम-रोम में श्री राम बसे हैं तो मैंने पूरे शरीर में सिंदूर लगा लिया।” यह देखकर सीता माता बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने अपने गले से मोती का हार निकाल कर उन्हें दे दिया। हनुमान जी ने उस माला को तोड़ दिया और एक-एक नग को देखने लगे। सीता माता ने कहा, “क्या कर रहे हो हनुमान। मैया मैं अपने राम को ढूंढ रहा हूँ, इसमें तो श्री राम नहीं है।” इसी भक्ति ने आपको श्रेष्ठ राम भक्त हनुमान बना दिया।