कुल पृष्ठ दर्शन : 1

उत्तम विचारों को जीवन में उतारने का संकल्प लें

पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
***********************************

जैन ग्रंथों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान् महावीर का जन्म चैत्र माह (हिंदू पंचांग) की १३ तिथि को बिहार के कुंडल ग्राम (वर्तमान कुंडलपुर) में हुआ था।
इधर, श्वेतांबर जैन धर्म के अनुसार महावीर जी का जन्म ५९९ ईसा पूर्व में हुआ था, जबकि दिगंबर जैन धर्म के अनुसार उनका जन्म वर्ष ६१५ ईसा पूर्व है। उनके माता-पिता राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला ने उनका नाम ‘वर्धमान’ रखा था।
जब वर्धमान ३० वर्ष के हुए तो सत्य की खोज के लिए अपने सिंहासन और परिवार को त्याग कर १२ वर्ष तक तपस्वी के रूप में वनवास में रहे। उन्होंने अहिंसा का उपदेश दिया। अपनी इंद्रियों पर असाधारण नियंत्रण दिखाने के कारण उन्हें ‘महावीर’ नाम मिला। ७२ वर्ष की आयु में उन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ था ।
भगवान् महावीर ने अपने ज्ञान आलोक से विश्व को नव प्रकाश दिया है। उनका प्रेरणास्पद जीवन दर्शन और महान् विचार हम सबको शिक्षा देते हैं कि सच्ची शांति और सुख आत्म ज्ञान और आत्म संयम में है। भगवान् महावीर द्वारा प्रतिपादित सत्य, अहिंसा एवं आत्म संयम की शिक्षाएं युगों-युगों तक समाज को प्रशस्त करती रहेंगीं।
महावीर स्वामी का पूरा जीवन सादगी, करुणा और आत्मज्ञान का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने समाज को सिखाया, कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं वरन् आत्मा की शुद्धि में छिपा है।
जैन धर्म के मुख्य सिद्धांत में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह है। जैन धर्म के अनुसार मोक्ष प्राप्ति के लिए ३ आवश्यक रत्न –सम्यक दर्शन (जैन तीर्थंकरों की शिक्षाओं पर अटूटट विश्वास करना), सम्यक ज्ञान (आत्मा, जीव और निर्जीव का सही और पूर्ण ज्ञान) एवं सम्यक चरित्र (पंच महाव्रतों का पालन करते हुए नैतिक और संयमित आचरण) है।
उनके १० अनमोल विचार आज भी जीवन जीने की कला सिखाते हैं –
🔹स्वयं पर विजय – भगवान् महावीर कहते हैं कि हजारों शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने से बेहतर है कि स्वयं पर विजय प्राप्त की जाए।
🔹अहिंसा – अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है। किसी भी जीव को कष्ट ना पहुँचाएं, क्योंकि हर प्राणी जीना चाहता है।
🔹सत्य की शक्ति – सत्य ही ईश्वर है। सत्य की खोज करें और सत्य का सदा साथ दें।
🔹क्रोध का त्याग – क्रोध को शांति से जीतें बुराई को अच्छाई से जीतें।
🔹अपरिग्रह – इच्छाओं पर नियंत्रण आवश्यक है। हमारी इच्छाएं अनंत हैं। जितना अधिक हम उन्हें पूरा करने की कोशिश करेंगें, इच्छाएं उतनी ही बढ़ती जाएंगीं। संतोष और अपरिग्रह सबसे बड़ा धन है।
🔹 स्वयं का उद्धार – आपकी आत्मा ही आपका सबसे बड़ा मित्र है और वही सबसे बड़ा शत्रु है। अपने उद्धार के लिए स्वयं को ही प्रयास करना पड़ेगा। किसी दूसरे पर निर्भर रहने से कुछ नहीं होगा ।
🔹अनेकांतवाद – सत्य के नजरिए का सम्मान करिए, क्योंकि सत्य के कई पहलू हो सकते हैं। दूसरे के विचारों को समझने का प्रयास करिए।
🔹कर्म का सिद्धांत–मनुष्य स्वयं अपने भाग्य का निर्माता है । आप जैसा बीज बोएंगें, वैसी ही फसल काटेंगें ।
🔹पवित्रता – पवित्रता बाहरी स्नान से नहीं, वरन् मन की शुद्धि से होती है या आती है। यदि आपका मन शुद्ध है, तो पूरा संसार ही आपके लिए सुखदाय़ी है।

यह अनमोल विचार आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धी जीवन में मानसिक शांति, संतुलन और सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। महावीर जयंती पर इन उत्तम विचारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें। अहिंसा, सत्य और संयम का पालन अवश्य करें, ताकि आपका जीवन सरल और सार्थक हो जाए।