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खुशियों की पतंग

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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मकर संक्रांति विशेष…

मकर संक्रांति में तिल-गुड़ की मिठास,
साथ बहन-बेटी व परिवार का बना रहता है
ऐसी रंग-बिरंगी हो जाती है ज़िंदगी,
क्योंकि यह है खुशियों की पतंग।

बच्चों की उमंगता, व्यंजनों की खुशबू से,
खुशी का संचार हो जाता है सूर्य के उत्तरायण होने पर
आसमान में लहराती है कागज की पतंग,
क्योंकि यह है खुशियों की पतंग।

दान-पुण्य व परम्परा और धार्मिक मान्यता का यह पर्व,
हमें जोड़े रखता है अपनी सनातन संस्कृति से
क्योंकि जीवन में यह पल बहुत कम हैं,
क्योंकि चार दिन की ज़िंदगी में लहरा रही खुशियों की पतंग।

यहाँ मांझे की डोरी ना जाने किसके हाथ में !
फिर आकाश में जब लहराती पतंग।
तो पूरा आसमान बहुत सुंदर व खूबसूरत लगता है,
क्योंकि यह है खुशियों की पतंग॥