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‘गणतंत्रोत्सव’ पर हुई राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत रचनाओं की प्रस्तुति

सोनीपत (हरियाणा)।

पावन ‘गणतंत्र दिवस’ की पूर्व संध्या पर कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार के तत्वावधान में २३३ वीं कल्पकथा साप्ताहिक आभासी काव्यगोष्ठी ‘गणतंत्रोत्सव’ अत्यंत गरिमामय एवं राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत वातावरण में हुई। यह साहित्यिक आयोजन सतत् राष्ट्रभावना की दिव्य प्रवाहधारा के साथ चलता रहा।
परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि गोष्ठी में देशभक्ति, सैनिकों के अमर बलिदान, भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम, भारतीय संविधान के महत्त्व, लोकतांत्रिक गणतंत्र की महिमा, गणतंत्रोत्सव का उल्लास तथा भारत माता के गौरवपूर्ण सम्मान पर आधारित सशक्त, ओजस्वी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया गया। शुभारंभ संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ, जिसका सुमधुर प्रस्तुतिकरण विजय रघुनाथराव डांगे (नागपुर) ने किया। अध्यक्षता भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’ (इटावा) ने की। मुख्य अतिथि डॉ. श्रीमती इंदु जैन ‘इंदु’ की रही।
आपने बताया कि कार्यक्रम में देशभर से जुड़े विद्वान सृजनकारों की सशक्त सहभागिता ने इसको बहुआयामी साहित्यिक ऊँचाइयों तक पहुँचाया। सृजनकारों में बिनोद कुमार पाण्डेय, ज्योति प्यासी, श्याम बिहारी मिश्र, आनंदी नौटियाल, पं. अवधेश प्रसाद मिश्र, रमेश चंद्र गौतम, दिनेश कुमार दुबे, हेमचंद्र सकलानी, कीर्ति त्यागी, डॉ. इंदु जैन, संस्थापक राधाश्री शर्मा व पवनेश मिश्र आदि प्रमुख रहे।
समापन चरण में राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के स्मरणोत्सव वर्ष के पावन अवसर पर अमर बलिदानी स्वतंत्रता सेनानियों एवं सैन्य वीरों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए सामूहिक वन्दे मातरम् गायन किया गया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण राष्ट्रभक्ति और देशप्रेम की दिव्य चेतना से आप्लावित हो उठा।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन परिवार से पवनेश मिश्र ने किया। राधाश्री शर्मा द्वारा हार्दिक आभार प्रकट किया गया।