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गणतंत्र सुनहरा, नित सम्मान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक

दमक रहा जो सूरज जैसा, लाता नवल विहान है।
भारत का गणतंत्र सुनहरा, जिसका नित सम्मान है॥

संविधान ने सम्प्रभुता दी, हर विकास को सींचा,
जनहित के रथ को जिसने तो, मजबूती से खींचा।
आम आदमी मुदित हो रहा, मंगल का नव गाना,
वर्ष छियत्तर की गति-मति है, सचमुच सफ़र सुहाना॥
खुशियाँ नगर-गाँव तक पहुँचीं, जीना अब आसान है,
भारत का गणतंत्र सुनहरा, जिसका नित सम्मान है…॥

भारत का गणतंत्र निराला, जनहित का अरमान है,
शिक्षा, रक्षा, जल, सड़कें हैं, अंतरिक्ष का मान है।
स्वास्थ्य और व्यापार विहँसता, लोकतंत्र की महिमा है
आम आदमी के हित महके, संविधान की गरिमा है॥
सीमा पर सैनिक है लड़ता, हलधर लिए किसान है,
भारत का गणतंत्र सुनहरा, जिसका नित सम्मान है…॥

सकल विश्व में शान हमारी, आभा को पाया है,
आँख न दिखला सकता कोई, उच्च शौर्य आया है।
लोककला, साहित्य की बेला, अर्थ का दौर रुपहला,
हम रिपु-सीने पर चढ़कर, बन रहते हैं दहला॥
दुख, पीड़ा, ग़म, व्यथा, वेदना, अब सबका अवसान है,
भारत का गणतंत्र सुनहरा, जिसका नित सम्मान है…॥

अंधकार सब दूर हुआ है, संविधान का वंदन,
जनकल्याणी दौर आज है, सुख का है अभिनंदन।
देश हमारा गणतंत्री है, संविधान की जय है,
सुर, लय, ताल सभी कुछ तो है, आज प्रगति की लय है॥
सभी मुश्किलें दूर हो गईं, हर जीवन में शान है,
भारत का गणतंत्र सुनहरा, जिसका नित सम्मान है…॥