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जीवन एक उत्सव

वंदना जैन
मुम्बई(महाराष्ट्र)
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जीवन का यही है ताना-बाना,
मदारी-सा नाच नचाना
पथ में आए शूलों में से,
चुन कर पुष्प सत्व पीते जाना।

सीख समझ जीवन की,
धैर्य मरहम से फटी बिवाइयाँ
अपनी भरते जाना,
जीवन उत्सव सम मनाना।

अनुभव संगीत सुनते जाना,
कुछ गीत गुनगुनाना
कुछ किस्से खुशियों के,
मन के पन्नों पर लिख
दोहराते जाना।

फिर दुखों को बिसराना,
जीवन उत्सव सम मनाना
संत्रस्त मन को माटी के तन में,
घोल मुस्कुराते जाना।

सरस कर्मों से,
पारस मन को रंगते जाना
धन-कुबेर,ठाठ-बाट के मोह से,
स्वयं को न बहलाना
रहे उन्नत सर सदा जीवन में,
अमृत पात्र नेकी का
भरते चले जाना।

चिर जीवन का स्वप्न सजाकर,
चित्त चिंतित न कर जाना
शेष दिनों को समझ त्योहार,
मन आनंदित करते जाना।
तुम जीवन उत्सव सम मनाना॥

परिचय-वंदना जैन की जन्म तारीख ३० जून और जन्म स्थान अजमेर(राजस्थान)है। वर्तमान में जिला ठाणे (मुंबई,महाराष्ट्र)में स्थाई बसेरा है। हिंदी,अंग्रेजी,मराठी तथा राजस्थानी भाषा का भी ज्ञान रखने वाली वंदना जैन की शिक्षा द्वि एम.ए. (राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन)है। कार्यक्षेत्र में शिक्षक होकर सामाजिक गतिविधि बतौर सामाजिक मीडिया पर सक्रिय रहती हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत व लेख है। काव्य संग्रह ‘कलम वंदन’ प्रकाशित हुआ है तो कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित होना जारी है। पुनीत साहित्य भास्कर सम्मान और पुनीत शब्द सुमन सम्मान से सम्मानित वंदना जैन ब्लॉग पर भी अपनी बात रखती हैं। इनकी उपलब्धि-संग्रह ‘कलम वंदन’ है तो लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा वआत्म संतुष्टि है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-कवि नागार्जुन व प्रेरणापुंज कुमार विश्वास हैं। इनकी विशेषज्ञता-श्रृंगार व सामाजिक विषय पर लेखन की है। जीवन लक्ष्य-साहित्य के क्षेत्र में उत्तम स्थान प्राप्त करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-‘मुझे अपने देश और हिंदी भाषा पर अत्यधिक गर्व है।’

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