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लेखन के लिए अनुभव, अनुभूति और कल्पना का सहारा लें: ममता कालिया

दिल्ली।

जीवन में जो जितने अधिक धक्के खाता है, उतना ही अधिक और बेहतर लिख सकता है। जिसका जीवन गमले के पौधे के समान व्यतीत होता है, उसके पास लिखने को बहुत कम होता है। ऐसा व्यक्ति केवल अपने अंतर्मन की बातें ही लिख पाता है।
  साहित्य अकादमी भारत सरकार से सम्मानित प्रसिद्ध कथाकार ममता कालिया ने हिन्दू कालेज में हिंदी विभाग के वार्षिकोत्सव ‘अभिधा-२०२६’ में यह बात कही। ‘लेखक से भेंट’ शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने अपनी चर्चित पुस्तकों की रचना प्रक्रिया के सूत्र भी बताए। लेखन के लिए उन्होंने अनुभव, अनुभूति एवं कल्पना का सहारा लेने पर बल दिया।
   इस आयोजन के दूसरे भाग में आयोजित विभिन्न स्पर्धाओं के विजेताओं को आपके द्वारा प्रशंसा पत्र दिए गए। विभाग के प्रभारी विमलेंदु तीर्थंकर ने ममता कालिया का सम्मान किया।
  विभाग की शिक्षिका प्रो. रचना सिंह ने आभार प्रदर्शित किया।