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ज्ञान की धार बहा दो माँ

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’
सहारनपुर (उप्र)
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ज़िंदगी एक वसंत (वसंत पंचमी विशेष)…

अविरल ज्ञान की धार बहा दो‌ सरस्वती,
भक्ति, प्रेम मम् वाणी सजा दो सरस्वती।

सर्व कला संपन्ना प्रकटी दुर्गा से,
शिव-भक्ति आशीष सदा दो सरस्वती।

अजपा सा शिव जाप चले उर के भीतर,
भक्ति शब्द गहने पहना दो सरस्वती।

शुभ वरदायिनी कमल आसिनी हे! माते,
दृढ़ भक्ति-आसन पे बिठा दो सरस्वती।

सुर के पंछी भक्ति-राग मन में गाएं,
संग सुंदर-सी वीणा बजा दो सरस्वती।

सुर साधूं लय‌‌ बाँधूं नाम शिव का ले-ले,
आप भी अपनी महती कृपा दो सरस्वती।

सिद्ध ज्ञानियों ऋषि-मुनि जन की वाणी,
आकर मुझको स्वयं सुना दो सरस्वती।

तुमको पुकारा माँ कह के अंतर मन से,
आत्मबोध अब मुझे करा दो सरस्वती।

नहीं भटकना मृत्यु लोक में मूरख बन,
परम विवेकी मुझे बना दो सरस्वती।

आपकी भांति श्वेत-वसन मन भाते हैं,
दोष-दाग सब इनसे हटा दो सरस्वती।

करे वंदना नतमस्तक हो ‘शिवदासी’,
परम विनीता भूल भुला दो सरस्वती।

अविरल ज्ञान की धार बहा दो सरस्वती,
भक्ति, प्रेम मम् वाणी सजा दो सरस्वती॥