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थकना तो मन का होता है

राधा गोयल
नई दिल्ली
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हौसलों में है तेरे अभी दम बहुत,
तू न थकेगा कभी, न रुकेगा कभी
जब तलक मन में रहती है दुर्बलता,
दु:ख में होता है दु:ख, सुख में है ममता
जग में सुख भी सदा रहने वाला नहीं,
दु:ख भी जीवन में रहता हमेशा नहीं
छाया से माया से दोनों होते सदा,
आते-जाते ही रहते हैं सुख और दु:ख
जिन्हें नाज था अपने सुख पर कभी,
सुख टिका रह सका न सकल ज़िंदगी।

दु:ख भी नश्वर यहाँ, सुख भी नश्वर यहाँ,
काया और माया का मोल तब ही यहाँ
जब काया से सबका करेगा भला,
माया को परमार्थ के काम में तू लगा
धन भी तेरे नहीं साथ जा पाएगा,
क्यों घुले सोच में, क्या है तेरा यहाँ ?
हौसलों में है तेरे अभी दम बहुत,
तू न थकेगा कभी, न रुकेगा कभी।
इरादों में थोड़ी-सी दृढ़ता हो गर,
थकन कोई भी बाँध सकती नहीं।
क्योंकि…
थकना तो ‘मन का’ होता है,
चलना तो ‘मन से’ होता है॥