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दिल के अरमां…

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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देखना एक दिन,
दुनिया से चले जाएंगे
ढूंढते फिरोगे,
बिल्कुल नज़र नहीं आएंगे
चर्चे होंगे हमारी वफ़ा के,
इस जमीं पर
और हम सिर्फ,
तस्वीर में नजर आएंगे।

बेजान-सी तन्हाई तुम्हें,
जीने नहीं देगी
रात के अंधेरों में,
जुगनू नज़र आएंगे
यादें रह जाएंगी बस,
हसीन पलों की
हसीन ख्वाब सब,
टूटकर बिखर जाएंगे।

न संगी होगा न साथी,
जमाने में तुम्हारा
सब रिश्ते-नाते,
धीरे-धीरे बदल जाएंगे
क्या करोगे जब,
घर से बेघर हो जाओगे
दिल के अरमां,
टूटकर बिखर जाएंगे।

स्वार्थी जमाना है,
सम्भल कर कदम रखना
वर्ना लोग तो,
मौत पर भी मुस्कुराएंगे
तड़प उठेगी आत्मा,
जब दोषारोपण होगा
आँखों से अश्रु बहेंगे,
होंठ कंपकंपाएंगे।

अपनी कमियों को,
उजागर न होने देना
लोग जीने नहीं देंगें,
मखौल उड़ाएंगे
हम तो चले जाएंगे,
ये दुनिया छोड़कर।
लेकिन अरमां तुम्हारे,
कभी जग न पाएंगे॥

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।

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