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पल भर का सुकून पाठक को मिल जाए, ऐसी कहानी होना चाहिए

भोपाल(मप्र)।

वर्तमान समय में हमें अपनी जड़ों को पहचानने की ज़रुरत है। आजकल पौराणिक पृष्ठभूमि की कहानियों का चलन है, लेकिन इसमें बहुत सावधानी की जरूरत है। प्रस्तुतिकरण अच्छा हो तो कहानी श्रोताओं को अपनी ओर सहज आकर्षित करती है। आज की मशीनी ज़िन्दगी में पल भर का सुकून पाठक को मिल जाए, ऐसी कहानी होना चाहिए।
यह बात अंतर्राष्ट्रीय विश्वमैत्री मंच की संस्थापक अध्यक्ष और प्रख्यात लेखिका संतोष श्रीवास्तव ने कही। अवसर बना उक्त मंच के अभिनव आयोजन कहानी संवाद ‘दो कहानी-दो समीक्षक’ कार्यक्रम में अध्यक्ष के नाते बोलने का, जो १६ फरवरी को आभासी रूप से आयोजित किया गया। संतोष श्रीवास्तव ने पढ़ी गई दोनों कहानियों और उन पर की गई समीक्षाओं की सराहना भी की।
मुख्य अतिथि गोविन्द शर्मा ने डॉ. रजनी मिश्रा की कहानी ‘अमावस का चाँद’ पर समीक्षात्मक टिप्पणी देते हुए कहा कि कहानी एक वाचिक परम्परा है। नानी-दादी की गोद में सुनी गई कहानियाँ, कहानियाँ न होकर संस्कार हैं। कहानी गाँव, कस्बे और किसानों से निकलकर अब आम आदमी की कहानी बन गई है। ‘अमावस का चाँद’ इस दुनिया से जाने वालों के साथ जो लोग बच जाते हैं, दरअसल उन लोगों की कहानी है। विधवा या पुनर्विवाह का होना बहुत आसान नहीं है। यह कहानी पुनर्विवाह की कहानी न होकर एक निबाह की कहानी है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. रीता दास राम ने कहा कि इंजीनियर आशा शर्मा की कहानी ‘गंगा किनारे वाली’ युवाओं के विचारों को समझने की कोशिश करती है तथा नए विचारों को प्रधानता देती हुई कहानी है।
मंच की मध्यप्रदेश इकाई की अध्यक्ष शेफालिका श्रीवास्तव ने सभी का स्नेहिल स्वागत किया।
कार्यक्रम में देश-विदेश से अनेक साहित्यकार व पत्रकार उपस्थित रहे।
संचालन महासचिव मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी ने किया। मंत्री जया केतकी शर्मा ने आत्मीय आभार व्यक्त किया।