कुल पृष्ठ दर्शन : 2

फर्क नहीं पड़ता

संजय एम. वासनिक
मुम्बई (महाराष्ट्र)
*************************************

उसे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता,
संक्रमण क्या है यह उसे नहीं पता!
उत्तरायण, दक्षिणायन, पुण्यकाल
या महापुण्यकाल, दान, उपवास, भजन या कीर्तन,
उसे इन सबका कुछ भी फर्क नहीं पड़ता।

धरातल पर मानव के अस्तित्व के,
पहले से ही, करोड़ों साल पहले से
वह तो केवल हाइड्रोजन जलाता है,
बाकी के सभी अर्थ मानव द्वारा निर्मित हैं
उत्तरायण शुभ है या दक्षिणायन!
उसे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता।

अगर हम उत्तरायण शुभ मानें,
तो दक्षिणायन अशुभ होगा क्या ?
लेकिन वैसा होता नहीं,
दक्षिणायन में फसलें आती हैं,
शादियाँ भी होती हैं
बच्चे पैदा होते हैं
व्यापार और कारख़ाने चलते हैं,
संस्कृति भी वही रहती है
अगर कुछ बदलता भी है तो,
उसे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता।

उसके लिए इंसान का कोई महत्व नहीं,
वह इंसान के लिए ना ही उगता है
ना ही ढलता है
बस सृष्टि के नियम से चलता है,
ऋतु हमारे लिए बदलती नहीं
सूरज हमें कोई अर्थ देता नहीं
उसे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता।

हर चीज़ का अर्थ हम ही तय करते हैं,
और उसे हम सूरज पर लादते हैं।
बस खुद का फायदा देखकर,
लेकिन इससे उसे कुछ फर्क नहीं पड़ता॥