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मतलब किसे वतन से है ?

तारा प्रजापत ‘प्रीत’
रातानाड़ा(राजस्थान) 
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गणतंत्र दिवस : देश और युवा सोच…

मतलब परस्त दुनिया में,
मतलब किसे है वतन से ?

अपनी-अपनी जेबें भरते,
ईश्वर से भी नहीं हैं डरते
काम इन्हें बस है धन से,
मतलब किसे है वतन से ?

लूट-खसोट किया करते हैं,
लाज स्त्रियों की हरते हैं
रहते नहीं हैं अमन से,
मतलब किसे है वतन से ?

प्रकृति को करते हैं दूषित,
बच्चे हो रहे हैं कुपोषित
बदबू आती है पवन से,
मतलब नहीं है वतन से ?

अपनी ढपली अपना राग,
हैवानियत की लगी आग
आँसू टपकते हैं नयन से,
मतलब किसे है वतन से ?

काट डाला वृक्षों का तन,
मलिन हुआ मनुज का मन।
खुशियाँ गई हैं जीवन से,
मतलब किसे है वतन से..??

परिचय– श्रीमती तारा प्रजापत का उपनाम ‘प्रीत’ है।आपका नाता राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ा स्थित गायत्री विहार से है। जन्मतिथि १ जून १९५७ और जन्म स्थान-बीकानेर (राज.) ही है। स्नातक(बी.ए.) तक शिक्षित प्रीत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। कई पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं,तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य पसंद का आम करना है। लेखन विधा में कविता,हाइकु,मुक्तक,ग़ज़ल रचती हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी पर कविताओं का प्रसारण होना है।

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