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मैं कौन हूँ ?

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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आज़ बहसबाजी चल रही है,
मैं पर बातचीत हो रही है
आखिर मैं आज़ क्यों ?
मैंने मैं पर इतनी बादशाहत क्यों दिखाई है ?
क्या यही जिंदगी की सच्चाई है…?

अपने बिछड़ गए,
सपनों में सैर करने चले गए
गाँव की मेड़ पर अकेला हूँ,
दोस्तों ने साथ छोड़ा है
मन्दिरों में भीड़-भाड़ है,
परन्तु मुझसे सब होशियार है।

गाँव के चौराहे पर खड़े हैं,
कोई बातचीत नहीं कर रहे हैं
स्कूलों में हम सब साथ थे,
नौकरी मिली और बन गए अनाथ हैं।

मैंने अपना ज़मीर बेच दिया है,
दोस्तों से दूरी बना ली है
मैंने मेरी औकात बता दी है,
गाँव में जगह खत्म कर दी है।

मयखाने में तिल भर की जगह नहीं है,
मन्दिरों में सुकून नहीं है
मेरी शराफ़त आज़ कामयाब नहीं दिखती,
लोगों को हम अब अजनबी लगते।

यहां यह तो एक अन्याय है,
सब जगह कोई पूछ नहीं बस हाय-हाय है
गिरजाघर आज़ खामोश है,
मस्जिदों में आज़ सब बस रोश ही रोश है।

चौक-चौराहों पर खूब मस्ती दिख रही है,
मैं खामोश हो बस इधर-उधर देखने को मजबूर हूँ
मेरी हरकतों ने मुझे मैं से अकेला बना दिया है,
अपनों से मरहूम कर दिया है।

क्या अपनी भूल मैं स्वीकार करूं ?
क्या कब किसी पर ऐतबार करूं
आज मुश्किल वक्त में मेरा कोई दोस्त नहीं,
सफलता क्या मिलीं थी और भूल हुई।

आज पछताने के सिवा कुछ नहीं है यहां मेरे पास,
सारी दुनिया दिख रही है उदास
दशहरा तीज त्यौहार ईद और बड़ा दिन क्या ?
गुरु पर्व हो या ग़म का त्योहार ही हो यहां।

बस एक शून्य हो चुकी है ज़िन्दगी मेरी,
कोई नजदिकी रिश्तों का नहीं नाम है बचा हुआ है
आज मैंने मैं से ही धोखा खाया है,
मैंने ही अपने लोगों से दूरियाँ बनाई है।
आज़ इसी पर बातचीत हो रही है,
कारणों को जानने की आजमाइश हो रही है॥

परिचय–पटना (बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता, लेख, लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम., एम.ए.(अंग्रेजी, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, हिंदी, इतिहास, लोक प्रशासन व ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी, एलएलएम, एमबीए, सीएआईआईबी व पीएच.-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन) पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित कई लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं, जिसमें-क्षितिज, गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा) आदि हैं। अमलतास, शेफालिका, गुलमोहर, चंद्रमलिका, नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति, चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा, लेखन क्षेत्र में प्रथम, पांचवां व आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के कई अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।