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ये जो कुमकुम…

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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ये लाल रंग
क्या कहा…रंग
एक सुहागन से पूछो…
नहीं यह लाल रंग नहीं,
संकेत है उमंग का सँग का आनंद का
यह जो कुमकुम है…।

यह लाल रंग अर्पण है प्रेम का…,
समर्पण है अहम का…
दर्पण है मैं का…,
यह सोच है, ओज है, ऊर्जा है
यह सिर्फ लाल रंग नहीं…
भाव है भावना है,
कामना और चाहना है।

एक कर्ज है कुमकुम…,
एक फर्ज भी कुमकुम…
चुटकी भर सिंदूर…,
एक मोह से जोड़ता…
एक मोह को तोड़ता है।

यह सुख है सुकून है…,
किसी कंधे को अपनी सारी चिंता
सुरक्षा दे कर चैन की नींद सोने की…
यह लाल रंग श्रृंगार नहीं…,
प्यार-मनुहार आचार-विचार और संस्कार है।

यह फितूर नहीं…,
माथे पर चमकता सिंदूर है…
यह जो लाल रंग है…
सभ्य समाज में जीने का ढंग है…।
यह शुभ है सगुन है…,
यह कुमकुम है…॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।

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