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विद्या धन सर्वहितकारी

धर्मेंद्र शर्मा उपाध्याय
सिरमौर (हिमाचल प्रदेश)
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‘विद्या धन’ सबधन सुखकारी,
‘विद्या धन’ सर्वजन प्रियकारी
‘विद्या धन’ सर्वलोक हितकारी,
‘विद्या धन’ सर्वोचित मन हारी।

‘विद्या धन’ देश-विदेश दिखाए,
‘विद्या धन’ हर एक प्रतिष्ठा दिलाए
‘विद्या धन’ को कभी चोर न चुराए,
‘विद्या धन’ संकीर्णता को दूर भगाए।

‘विद्या धन’ तीसरा नेत्र हमारा,
जन-जन को जो लगता प्यारा
‘विद्या धन’ सत्य पथ पर चलाता,
विचलित मन को राह दिखाता।

‘विद्या धन’ सर्वव्यापक सोच बनाता,
मनुज–मनुज से प्रेम करुणा बढ़ाता
‘विद्या धन’ हिंसा से बचाता,
संस्कारमय जीवन बनाता।

‘विद्या धन’ व्यवहार कुशल करवाता,
विनम्र आदर भाव सिखाता
‘विद्या धन’ आत्मविश्वास दिलाता,
पग–पग पर रक्षा लाज बचाता।

‘विद्या धन’ का दुश्मन आलस,
प्राप्त उसको न करने देता।
भोग विलास को कम जो आंके,
वही दुनिया के झरोखे से झांके॥