ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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भविष्य का प्रहरी है, संस्कार हमारी कुंजी है,
इसे बचाकर रखना है, जो वेद हमारी पूंजी है।
लौट चलें वेदों की ओर, जो राही भटक रहे हैं,
जिसने इसका पालन किया, वही तो संभल रहे हैं।
वेदों को संकलित किया था ऋषि वेद व्यास ने,
इसके चार प्रकार बताए प्राचीन ऋषि वेद व्यास ने।
ये है-ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद,
अठारह महापुराण हैं, अत्यंत प्राचीन में है ऋग्वेद।
ब्रह्म पद विष्णु वायु श्रीमदभागवत अग्नि नारद,
ब्रह्म वैवर्त स्कंद मार्कण्डेय कूर्म लिंग और वामन।
मत्स्य ब्रह्मांड और भविष्य पुराण ऋग्वेद के दस मंडल,
प्रथम अनेक ऋषि, दूसरा गृत्समद, तीसरा विश्वामित्र मंडल।
ऋषि वेद व्यास के पाँच शिष्य थे इनके महान,
पैल, जैमिन, सुमन्तुमुनि, रोमहर्षण वैशम्पायन।
कहा जाता है पाँचवा वेद ‘महाभारत’ को,
नवग्रह स्रोत कल्कि पुराण और महाभारत को।
वेद में है सब सार सुख, कर इसका पालन न होय दु:ख,
खुद भी जानें, औरों को बताएं, कर्म न अपना कभी रूक।
वेद में भंडार है संसार का ज्ञान, जो भी चाहे नित ले ले ज्ञान,
है खुली पुस्तक नित ध्यान, मनन कर शीश झुका ले ले ज्ञान॥