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संकट हरने आए राम

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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अधर्म का पाप धरा पर फैला,
चारों ओर बुरा व्यवहार
माँ धरती ने दुःख सहा,
संकट हरने आए मर्यादा पुरुषोत्तम राम।

त्रेता युग में राक्षस फैले चारों ओर,
त्राहिमाम करती धरा, वेदना हर ओर
चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी लाई नई भोर,
प्रकट हुए कृपाला-दीनदयाला, छाया प्रकाश चारों ओर।

धरा का संताप तब मिटा,
चतुर्दिक फैली नई उमंग
अपने आचरण में समेटे नीति का सार,
एक ही थे श्रीराम के रंग।

पापी रावण का अंत किया,
अपनी लीला दिखाई भरपूर
असत्य पर सत्य की विजय हुई,
गूँज उठा त्रेता युग भरपूर।

उनकी लीला अपरम्पार है,
वे आदि, अनंत, अद्वितीय हैं॥