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‘संक्रांति’ है खुशी का सन्देश

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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मकर राशि में सूरज आया,
तिल-तिल दिन को बढ़ना भाया
सर्दी को अब दूर भगाया,
ख़ुशी का यह संदेश लाया।

स्नान-ध्यान और पूजा करते,
तिल-गुड़, खिचड़ी दान में देते
संक्रांति तो सभी मनाते,
मूँगफली और गजक हैं खिलाते।

खेतों में फसल पक जाते,
गाँवों में किसान हर्षाते
गुड़ और तिल का भोग लगाते,
एकसाथ सब मिलकर खाते।

उत्तर पथ को चरण बढ़ाए,
सूरज अब उत्तरायण आए
स्वर्ण-प्रभा घर आँगन छाए,
मधुकर मंद-मंद मुस्काए।

बीहू, पोंगल, खिचड़ी आई,
लोहिड़ी में रेवड़ी है खाई।
आसमान में पतंग उड़ाई,
नीली-पीली रंग जो भायी॥