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सभी वृद्धजन पूज्य हमारे

अमल श्रीवास्तव 
बिलासपुर(छत्तीसगढ़)

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अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध नागरिक दिवस विशेष…..

दादा-दादी, नाना-नानी,
से घर-द्वार दमकता है
नाती-पोतों की किलकारी,
से घर, घर-सा लगता है।

माता-पिता न जाने कितने,
देवी-देव मनाते हैं ?
संतानों की सुख-सुविधा हित,
कितना कष्ट उठाते हैं ?

खुद सो जाते गीले में,
बच्चों को सूखा बिस्तर है
गोदी, कंधा, पीठ, सवारी,
एक, एक से बढ़कर है।

उंगली पकड़-पकड़ चलवाते,
लिखना-पढ़ना सिखलाते
विद्यालय, कॉलेज सब जगह,
शिक्षा-दीक्षा, दिलवाते।

तिथि-त्योहारों में जब भी,
कुछ भी पकवान बनाते हैं
खिला-पिलाकर, बच्चों को,
फिर बचा-कुचा खुद खाते हैं।

खान-पान में, रहन-सहन में,
हर संभव कोशिश करते
खुद रह लेते हैं अभाव में,
संतति के हित जुट पड़ते।

पढ़-लिखकर कुछ बन जाते,
तब शादी-ब्याह रचाते हैं
बेटों के पसंद की बहुएं,
खुशी-खुशी घर लाते हैं।

बेटी को भी योग्य बनाकर,
उत्तम ब्याह रचाते हैं
माता-पिता यथा संभव,
सब अपना फर्ज निभाते है।

कुछ दिन ठीक-ठाक सब रहता,
फिर दरार बढ़ती जाती
वृद्धाश्रम में रहने तक की,
फिर मजबूरी बन जाती।

बेटी, पिता और माता का,
ख्याल हमेशा रखती है
लेकिन सास-ससुर की वह भी,
सदा उपेक्षा करती है।

जोड़-जोड़ कण, तिल-तिल चुन,
जो घर-परिवार बसाते हैं,
एक दिवस ऐसा भी आता,
वही विमुख हो जाते हैं।

ये बहुएं, बेटे, कलयुग के,
करना क्या था, क्या करते ?
पालन, पोषण, सृजन किया,
उनको ही घर, बाहर करते।

सोचो! पिता और माता,
सब खोकर के क्या पाते हैं ?
एकाकीपन और उपेक्षा,
कितना सब सह जाते हैं ?

देख दुर्दशा वृद्धजनों की,
मानवता कंपित होती
सूरज, अम्बर, चाँद-सितारे,
धरती फफक-फफक रोती।

वृद्धजनों को जो अपने,
घर में रखने तैयार नहीं
उन्हें उचित है जालिम कहना,
मानव के हकदार नहीं।

वृद्धजनों के प्यार, त्याग का,
कोटि-कोटि अभिवादन है
वृद्धों के चरणों का पानी,
गंगा जल-सा पावन है।

कितने कष्ट, और संकट सह,
घर-परिवार सजाते हैं
जो करता है वही जानता,
कितनी ठोकर खाते हैं।

माता और पिता का रिश्ता,
देवों से भी ऊंचा है
करो नहीं अपमानित उनको,
जिनने तुमको सींचा है।

आओ अपनी भूल सुधारें,
शाश्वत का आह्वान करें
नहीं प्रताड़ित हों बुजुर्गजन,
संकल्पित अभियान करें।

मानव का जीवन अमूल्य है,
हर पल इसका ध्यान करें।
सभी वृद्धजन पूज्य हमारे,
अभिनंदन, सम्मान करें॥

परिचय–प्रख्यात कवि,वक्ता,गायत्री साधक,ज्योतिषी और समाजसेवी `एस्ट्रो अमल` का वास्तविक नाम डॉ. शिव शरण श्रीवास्तव हैL `अमल` इनका उप नाम है,जो साहित्यकार मित्रों ने दिया हैL जन्म म.प्र. के कटनी जिले के ग्राम करेला में हुआ हैL गणित विषय से बी.एस-सी.करने के बाद ३ विषयों (हिंदी,संस्कृत,राजनीति शास्त्र)में एम.ए. किया हैL आपने रामायण विशारद की भी उपाधि गीता प्रेस से प्राप्त की है,तथा दिल्ली से पत्रकारिता एवं आलेख संरचना का प्रशिक्षण भी लिया हैL भारतीय संगीत में भी आपकी रूचि है,तथा प्रयाग संगीत समिति से संगीत में डिप्लोमा प्राप्त किया हैL इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स मुंबई द्वारा आयोजित परीक्षा `सीएआईआईबी` भी उत्तीर्ण की है। ज्योतिष में पी-एच.डी (स्वर्ण पदक)प्राप्त की हैL शतरंज के अच्छे खिलाड़ी `अमल` विभिन्न कवि सम्मलेनों,गोष्ठियों आदि में भाग लेते रहते हैंL मंच संचालन में महारथी अमल की लेखन विधा-गद्य एवं पद्य हैL देश की नामी पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैंL रचनाओं का प्रसारण आकाशवाणी केन्द्रों से भी हो चुका हैL आप विभिन्न धार्मिक,सामाजिक,साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े हैंL आप अखिल विश्व गायत्री परिवार के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। बचपन से प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पुरस्कृत होते रहे हैं,परन्तु महत्वपूर्ण उपलब्धि प्रथम काव्य संकलन ‘अंगारों की चुनौती’ का म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मलेन द्वारा प्रकाशन एवं प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री सुन्दरलाल पटवा द्वारा उसका विमोचन एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय द्वारा सम्मानित किया जाना है। देश की विभिन्न सामाजिक और साहित्यक संस्थाओं द्वारा प्रदत्त आपको सम्मानों की संख्या शतक से भी ज्यादा है। आप बैंक विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. अमल वर्तमान में बिलासपुर (छग) में रहकर ज्योतिष,साहित्य एवं अन्य माध्यमों से समाजसेवा कर रहे हैं। लेखन आपका शौक है।

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