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हिन्दी में देश की संवेदनाएँ और करुणा की अभिव्यक्ति-राज्यपाल

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन महाधिवेशन…

पटना (बिहार)।

देश में सभी भारतीय भाषाओं की उन्नति हो, यह आवश्यक है, किंतु एक स्वतंत्र राष्ट्र के लिए आवश्यक है कि देश की एक भाषा को इस तरह अवश्य विकसित किया जाए, जिसमें पूरा देश संवाद कर सके और हिन्दी यह कार्य कर रही है। इसमें देश की संवेदनाएँ और करुणा की अभिव्यक्ति होती है। दक्षिण भारत में लोग हिन्दी को राष्ट्रीयता की भावना से देखते हैं।
यह बातें सिख पंथ के नवम गुरु और बलिदानी संत गुरु तेग बहादुर के बलिदान के ३५० वें वर्ष को समर्पित बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के ४४ वें महाधिवेशन का उद्घाटन करते हुए बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कही।
अध्यक्षीय संबोधन में सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि हिन्दी देश की आत्मा है। भारत की सुंदरतम अभिव्यक्ति इसी भाषा में हो सकती है। देश के लोग चाहते हैं कि यह देश की राष्ट्रभाषा बने। शासन को चाहिए कि जनाकांक्षा पूरी करे। इस अवसर पर डॉ. सुलभ ने राज्यपाल को सम्मेलन की उच्च मानद उपाधि ‘विद्या वारिधि से विभूषित किया। राज्यपाल ने वरिष्ठ लेखिका किरणसिंह की पुस्तक ‘ऋषिःकवि-पत्रकार ए.आर. आजाद’, ‘नदी’ और सम्मेलन की पत्रिका ‘सम्मेलन साहित्य’ के महाधिवेशन विशेषांक का लोकार्पण भी किया। मॉरिशस की सुविख्यात विदुषी डॉ. सरिता बुधु और केंद्रीय हिन्दी संस्थान (आगरा) के निदेशक डॉ. सुनील बाबूराव कुलकर्णी समेत देश के २२ ख्यात हिन्दी-सेवियों को विविध अलंकरणों से सम्मानित किया।
समारोह के मुख्य अतिथि और सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद रहे। आरम्भ में अतिथियों का स्वागत महाधिवेशन के स्वागताध्यक्ष व विधायक डॉ. राजवर्धन ने किया। आयोजन में हिन्दी के अत्यंत लोकप्रिय ग़ज़लकार दुष्यंत की गजलों का गायन शंकर प्रसाद ने किया। आयोजन में सत्र सहित कवि सम्मेलन भी हुआ।
मंच संचालन उपाध्यक्ष डॉ. शंकर प्रसाद ने किया। धन्यवाद उपाध्यक्ष डॉ. मधु वर्मा ने माना।