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‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ पर हुई ‘नारी ही नारायणी’ विशेष काव्य गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)।

कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा आयोजित २३९वीं साप्ताहिक आभासी काव्य गोष्ठी ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के पावन अवसर पर ‘नारी ही नारायणी’ विषय पर अत्यंत साहित्यिक वातावरण में कराई गई। बलौदा से विदुषी साहित्यकार डॉ. गीता विश्वकर्मा मुख्य अतिथि रहीं।
संस्था की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि इसमें देश के विभिन्न प्रांतों से जुड़े विद्वान साहित्यकारों, कवियों एवं रसिक श्रोताओं ने सहभागिता कर नारी शक्ति के गौरव, सम्मान और महिमा का भावपूर्ण काव्याभिव्यक्ति के माध्यम से अभिनंदन किया। अध्यक्षता बैंगलोर से प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. लता चौहान ने की। शुभारम्भ विद्वान साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे (नागपुर) द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना के मधुर गायन से किया गया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण भक्तिभाव से आलोकित हो उठा। तत्पश्चात विभिन्न प्रदेशों से जुड़े प्रतिभागी साहित्यकारों ने विषय पर उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुतियों से नारी की महिमा और सृजनशीलता को अभिव्यक्त किया। इस अवसर पर मनोज कुमार गुप्ता, मंजुल ओजकवि, अतुल कुमार खरे, अनीषा जैन, अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, बिनोद कुमार पाण्डेय, डॉ. शशि जायसवाल, सुनीता रानी ममगई, कविता नेमा ‘काव्या’, रश्मि रानी कौशल, दिनेश कुमार दुबे, ज्योति प्यासी और पवनेश मिश्र आदि ने प्रस्तुति दी।
डॉ. चौहान ने अध्यक्षीय उद्बोधन में नारी को सृष्टि की मूल चेतना और संस्कृति की धुरी बताते हुए कहा कि नारी के सम्मान में ही समाज की समृद्धि और सभ्यता की प्रतिष्ठा निहित है। अतिथि डॉ. विश्वकर्मा ने नारी शक्ति के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्वरूप को रेखांकित करते हुए साहित्यकारों की रचनात्मक चेतना की सराहना की।

कार्यक्रम का प्रभावी संचालन आशुकवि भास्कर सिंह ‘माणिक’ ने किया। तत्पश्चात सभी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता संस्था की संस्थापक श्रीमती राधाश्री शर्मा ने व्यक्त की।