कुल पृष्ठ दर्शन :

अधिकार, विचार और निर्णय में दें समान अवसर

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
*********************************************

नारी : संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता।”
जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवता बसते हैं। भारत भूमि नारियों को महान बनाने की भूमि रही है। अतः, यहाँ नारी को विशिष्ट स्थान प्राप्त है। हमारे पुराने ग्रंथों में भी नारी की वीरता का प्रमाण मिलता है। चाहे झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई हों, इंदौर की महारानी अहिल्याबाई हों, सभी ने अपनी वीरता दिखलाई।
नारी ही जीवन रूपी गाड़ी के २ पहियों में से एक है, जिसके बिना पुरुष के साथ समाज की गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकती। आज उसी नारी को पुरुष-प्रधान समाज में संघर्ष करना पड़ रहा है। फिर भी नारी अपने साहस, धैर्य और त्याग के बल पर समाज को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती रही है।
क्या सावित्री ने अपने तप से मृत्यु के देवता से भी अपने पति के प्राण लौटवाए नहीं थे ? क्या राजा दशरथ के रथ का कील निकलने पर कैकेयी ने उन्हें बचाया नहीं था ? सच मानो, तो आज के इस कठिन युग में नारी शक्ति के रूप में कल्पना चावला को कौन नहीं जानता। भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी तथा प्रथम महिला राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी पाटिल भी संघर्ष के बाद सफलता प्राप्त कर सफलता के शिखर तक पहुँचीं।
ऐसी सफलता के लिए—लैंगिक भेदभाव को मिटाना होगा, नारी को समानता का अधिकार दिलाना होगा, सभी क्षेत्रों में महिलाओं का उत्थान करना होगा और सशक्तिकरण के लिए महिलाओं को उनके अधिकारों से अवगत कराना होगा। महिलाओं के सशक्त होने से पूरा समाज सशक्त हो जाएगा। महिलाओं एवं पुरुषों के बीच की असमानता कई समस्याओं को जन्म देती है।
भारत सरकार द्वारा नारी सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जैसे —’बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना। नारी सशक्तिकरण के सपने को साकार करने के लिए लड़कियों के महत्व एवं शिक्षा को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो अपनी निजी स्वतंत्रता और सपनों के पंखों को फैलाने के लिए नारी को अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है।
समाज एवं परिवार की जड़ें पेड़ की जड़ों के समान होती हैं। जड़ों के मजबूत होने से ही पेड़ मजबूत होता है। उसी प्रकार अधिकार, विचार और निर्णय के स्तर पर नारी को समान अवसर देना उन्हें सशक्त बनाता है। समाज के सभी क्षेत्रों में पुरुष और नारी दोनों के लिए परस्पर सहयोग और सम्मान आवश्यक है।
देश, समाज और परिवार के उज्ज्वल भविष्य के लिए नारी सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है। नारी को स्वस्थ और उपयुक्त वातावरण मिलना चाहिए, तभी एक सफल और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है-
“नारी मोहताज नहीं किसी गुलाब की,
वो खुद बागवान है इस कायनात की।

नारी की जिस शक्ति को शायद कम आँका गया,
नारी बिन इस दुनिया में जीवन का कोई आधार नहीं।

स्त्री को सृजन की शक्ति माना, पुरुष को नई पहचान दिलाना।
युग-संसार नारी शक्ति को पहचाना,
वह देश की धरोहर है, अबला नहीं कहना।”