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‘इक्कीसवाँ मिनट’ प्रभावशाली कहानी संग्रह-डॉ. नुसरत मेहदी

भोपाल (मप्र)।

‘इक्कीसवाँ मिनट’ एक सार्थक और प्रभावशाली कहानी संग्रह है। इसमें स्मृति, करुणा, न्याय-बोध और मानवीय संवेदना की अनेक सूक्ष्म धाराएँ प्रवाहित हैं। यह संग्रह केवल कहानियों का संकलन नहीं, बल्कि हमारे समय के सामाजिक और नैतिक प्रश्नों पर एक गंभीर साहित्यिक संवाद भी प्रस्तुत करता है।
यह बात मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने बतौर सारस्वत अतिथि

कही। अवसर रहा मध्यप्रदेश लेखक संघ के अध्यक्ष राजेंद्र गट्टानी की अध्यक्षता, वनमाली कथा के सम्पादक मुकेश वर्मा के मुख्य आतिथ्य में देश की वरिष्ठ कथाकार संतोष श्रीवास्तव की कथात्मक कृति ‘इक्कीसवाँ मिनट’ की कहानियों पर गहन विमर्श का।
सर्वप्रथम संतोष श्रीवास्तव ने कृति की संरचना, भूमिका और रचना प्रक्रिया के अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस संग्रह की कहानियों को लिखते हुए मैंने हर चरित्र को जिया है, उनसे संवाद किया है, उनकी प्रसन्नता से प्रसन्न हुई हूँ, उनके आँसुओं को अपनी आँखों में उमड़ते पाया है। मेरी कहानियों ने स्त्री अस्मिता को पुनः परिभाषित करने की कोशिश में अपने स्त्री पात्रों को हारने नहीं दिया है।
श्री गट्टानी ने कहा कि इस संग्रह की कहानियाँ मार्मिक है, जो पाठक को उद्वेलित करती हैं। मुख्य अतिथि ने संग्रह की समालोचनात्मक समीक्षा प्रस्तुत करते हुए ‘इक्कीसवाँ मिनट’ को बेहतरीन कहानियों का संग्रह बताया। इनकी कहानियों में विविधता है, जो पाठक को झकझोरती है।
आयोजन में नीलिमा रंजन ने सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि ‘इक्कीसवाँ मिनट’ अंतस के मर्म से यथार्थ को रोमांचक बनाती चौदह सार्वभौमिक कहानियों का संग्रह है, जिसकी प्रत्येक कहानी में उपन्यास बनने का रहस्य छुपा है।
संजय द्विवेदी ने सस्वर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। स्वागत वक्तव्य सुनील चतुर्वेदी ने दिया। दूसरे सत्र में भोपाल शहर के नामचीन कवियों ने फागुन और बसंत पर कविताएं सुना कर समा बांधा।
कार्यक्रम का सरस संचालन जया केतकी शर्मा ने किया।