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ईश्वर की लीला

कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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कैसी है लीला ईश्वर की,
किसी को फूल मिले
किसी को काँटे मिले,
एक झोली में फूल पड़े हैं
एक झोली में काँटे हैं,
कोई तो ईश्वर का कारण होगा।

तेरे-मेरे बस में कुछ भी नहीं,
यह सब तो बांटने वाला बांटे हैं
कोई तो कारण होगा,
पहले बनती है तकदीरें
फिर बनते हैं शरीर,
यह तो उस भगवान की कारीगरी है
भला तुम क्यों हो गंभीर ?
कोई तो कारण होगा।

ज़हर बस हो नागों का तन में,
फिर मिल जाए जीवनदान
कभी-कभी नन्हीं चींटी से भी मिट सकता है संसार,
ना रहता किसी का नामो-निशान
कोई तो कारण होगा।

धन से विस्तार गद्दे वाला मिल जाए,
पर नींद को तरसे नैना
काँटों पर भी सोकर आए,
किसी के मन को चैन
कोई तो कारण होगा।

कभी मिले मिट्टी से मोती,
पत्थर से बना लेते भगवान
भगवान की बनाई मूरत को भी, ठोकर दे जाए इन्सान
कोई तो कारण होगा।
एक के हिस्से फूल खिले,
एक के पास काँटे मिले
कोई तो कारण होगा॥