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कर्तव्य करते जाना

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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कर्तव्य करते जाना है, दिल में सुकून लाना है,
कर्तव्य अपना पूर्ण करूँ, ऐसा मन में ठाना है।

कर्तव्य कार्य मिलता है, सिर्फ मानवों को ही,
भाग्य मिले पशुओं को, क्या किसी ने जाना है ?

कर्तव्य सभी अपना, ईमानदारी से करें परिपूर्ण,
ईश्वर से डरें सब, क्यों किसी को नर्क में जाना है ?

इतना जान लो सज्जनों, जैसा करोगे वैसा भरोगे,
आज है मेरी बारी, कल तेरी बारी भी आना है।

नज़र कमजोर झुकी कमर, बहरापन, हाथ में लाठी,
अलग कमरा, दवाइयों का ढेर, औरों से गाली खाना है।

बच्चे हमारे संस्कारी हों, हमें ऐसा पाठ पढ़ाना है।
झूठ, बेईमानी, अशिष्ट व्यवहार, कुछ काम नहीं आना है।

माँ-बाप और बड़े-बूढों का, नित ध्यान-सम्मान करो,
अपने कर्तव्य से हमें, बिल्कुल नहीं घबराना है।

याद रहे साथियों हमारा, कर्तव्य ही इक आईना है।
हमारे बच्चे घर से ही सीखते, ये सच सबने माना है।

कर्तव्य करते जाना है, दिल में सुकून लाना है,
कर्तव्य अपना पूर्ण करूँ, ऐसा मन में ठाना है॥