सोनीपत (हरियाणा)।
हिन्दी भाषा और सनातन संस्कृति हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था की २३०वीं आभासी काव्य गोष्ठी भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को समर्पित रही। इसकी अध्यक्षता हल्द्वानी से प्रबुद्ध साहित्यकार गोपाल कृष्ण बागी ने की। उत्तरकाशी से विद्वत रचनाकार डॉ. अंजू सेमवाल ने मुख्य आतिथ्य का पदभार सम्हाला।
संस्था की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया, कि भास्कर सिंह ‘माणिक’ के मंच संचालन में कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे (नागपुर) द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया, जिसमें प्रेम कवि, पद्म श्री, पद्म भूषण गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ को श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति वरिष्ठ साहित्यकार बिनोद कुमार पाण्डेय (सीवान) द्वारा दी गई, उसके बाद तो मानों संध्या भक्ति रंगों से सराबोर होने लगी। अमित पण्डा, श्री डांगे, किरण अग्रवाल, नन्द किशोर बहुखंडी, ज्योति प्यासी, कविता जैन कुहक, दुर्गादत्त मिश्र, डॉ. श्याम बिहारी मिश्र, आनंदी नौटियाल अमृता, सुनील कुमार खुराना सहित ‘माणिक’, राधाश्री शर्मा एवं पवनेश मिश्र ने काव्य पाठ किया।
भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित मंत्रमुग्ध करती रचनाओं के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए अध्यक्ष श्री बागी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने बालपन से ही राक्षसों का अंत करने की शुरुआत करते हुए शक्ति का प्रयोग सज्जनों और सत्य की रक्षा के लिए करने का संदेश दिया। डॉ. सेमवाल ने सहभागी साहित्यकारों की प्रशंसा करते हुए आयोजन को सफल बताया।
कार्यक्रम में राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ स्मरणोत्सव के १५०वें वर्ष में अमर बलिदानियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करते हुए वन्दे मातरम् का गायन किया गया।
अतिथियों, साहित्यकारों एवं दर्शकों का आभार संस्थापक श्रीमती राधाश्री शर्मा ने माना।