सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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अविरल सुख बरसे।
बरबस यह हरसे॥
मन रह-रह कहते।
पुलकित तुम सरसे॥
सुरभित पवन बहे।
कलियन मदन कहे॥
दिन-दिन तुम खिलते।
उपवन महक रहे॥
गुन-गुन कर भँवरे।
मधु-रस सुलभ करें॥
पुलकित मन कहते।
मधुबन पुलक भरे॥
दुख जग सब हरने।
करतब कुछ करने॥
अवतरित जगत में।
भगवन शुभ करने॥