कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,
हैदराबाद (तेलंगाना)
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विश्व हिन्दी (१० जनवरी) विशेष…
हिंदी केवल भाषा नहीं, जीवन की पहचान है,
जन-जन के हृदय में बसी, भावों की मुस्कान है
माटी की सौंधी खुशबू, शब्दों में ढली हुई,
संस्कारों की उजली धारा, युग-युग से चली हुई।
राजमहलों से गलियों तक, इसका ही विस्तार है,
लोकस्वर की इस वाणी में, भारत का संसार है
कबीर की निर्भीक पुकार, तुलसी का विश्वास है,
प्रेमचंद की पीड़ा भी, इसमें ही आवास है।
गाँव की चौपाल गूँजे, विश्व मंच पर छाए,
हिंदी ही हर दूरी को, अपने स्वर से मिटाए
संघर्षों की राहों में यह, बनकर दीप जली,
अँधियारे समय में भी, आशा की लौ पली।
डिजिटल युग की दौड़ में, हिंदी पीछे नहीं,
नव सोच, नव सृजन बनी, यह कहीं ठहरी नहीं।
भारत की आत्मा बोले, इसके हर उच्चार में,
‘विश्व हिंदी दिवस’ कहे-हिंदी अमर संस्कार में॥
परिचय – कवि व अनुवादक कमलेकर नागेश्वर राव का साहित्यिक उपनाम ‘कमल’ है। आप सरकारी अध्यापक (हिंदी) ने रूप में जिला नागर कर्नूल के वेल्दंडा में कार्यरत हैं। तेलंगाना राज्य के रंगा रेड्डी जिले में निवासरत ‘कमल’ की तेलुगू और हिंदी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ व विशेष आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। इनको श्री श्री कला वेदिका राजमंड्री वालों से ‘साहिती मित्रा’ पुरस्कार, आदित्य संस्कृति (मप्र) से ‘हिंदी सेवी’ तथा डाॅ.सीता किशोर खरे स्मारक साहित्य पुरस्कार आदि मिले हैं।