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दिल हमारा पल-पल टूटता

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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दिल हमारा पल-पल टूटता है,
और सदियों से दिल ये रोता है
अंदर में हूक-सी उठती है,
जैसे हर पल कुछ छूटता है।

बाहर से बिल्कुल शांत होता है,
पर अंदर में तूफान भरा होता है
सब-कुछ बिखरा-बिखरा होता है,
जैसे सब-कुछ उजड़ा-उजड़ा होता है।

कुछ पाने की चाहत होती है,
कुछ खोने का ग़म भी होता है
इक दिन सब कुछ छूट जाना है,
इसी बात का तो रोना होता है।

कर्म हमारा अपना रह जाना है,
फल ही कुछ मीठा तीखा होता है।
समझ न आए हमें क्या होता है,
बस इतना जानूं सब अच्छा होता है॥