बबिता कुमावत
सीकर (राजस्थान)
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नारी अब केवल कोमल काया नहीं रह गई है,
वह शक्ति का अद्भुत भंडार हो गई है।
ममता, करुणा, प्रेम की मूर्ति के साथ-साथ,
वह जीवन का आधार भी बन गई है।
जब वह संसार में माँ का रोल निभाती है,
तो अपने आँचल में पूरे जग को समेट लेती है।
अपने सपनों को तो भूल जाती है,
पर अपनी संतानों के भविष्य के बारे में सोचती है।
कभी बहन बनकर स्नेह सब पर लुटा देती है,
कभी पत्नी बनकर पति का साथ निभाती है।
हर कठिन राह में कदम से कदम मिलाकर चलती है,
जीवन की डगर को भी आसान बना देती है।
उसकी मुस्कान में पूरे परिवार की, पूरे संसार की खुशियाँ बसती हैं
उसकी आँखों में पूरे परिवार के सपनों का संसार है।
पर यदि कभी अन्याय उसके सामने आता है,
तो वह दुर्गा बन जाती है।
जब अत्याचार अधिक बढ़ने लगता है,
जब मानवता भी सीखने लगती है।
तब नारी का दुर्गा रूप धर्म से युद्ध करने लग जाता है,
उसके हाथों में साहस की शक्ति तो होती है।
उसके हृदय में अधिक विश्वास भी होता है,
वह जब अन्याय देखती है तो उसके विरुद्ध खड़ी हो जाती है।
और बुराई का नाश भी कर देती है,
नारी ज्योति है सृजन की, जीवन की वह पहचान बनती है।
उसके बिना तो यह सृष्टि अधूरी-सी लगती है,
क्योंकि नारी इस संपूर्ण संसार की शान है।
इसलिए सभी नारी का मान करो,
क्योंकि उसके अस्तित्व का सम्मान करने से संसार की शोभा बढ़ती है।
नारी ही दुर्गा का रूप है,
इस सत्य को सभी स्वीकार करो॥