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पढ़ाई ही सब कुछ

कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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मन था विश्वास, मन का है सम्मान,
मान मिले या मिले अपमान
पढ़ना है और बस पढ़ना है,
पढ़ कर ही सब मिल सकता है।

संघर्ष है जीवन से
अपमान का घूंट पीना है
जात-पात को खत्म करना है,
मिले सबको सम्मान।

पूजा का मंदिर हो या हो अस्पताल ,
या हो कोई समारोह सब जगह
ऊँच-नीच का भेद रहे न,
सब हैं ईश्वर की संतान।

संघर्ष किया सदा वह बच्चा, नाम था भीमराव आम्बेडकर,
दिया साथ बस पत्नी ने, चली हर कदम साथ
क्यूं भूले हो तुम उस महान महिला को,
जिसने हर पल साथ दिया अपने पति का।

पढ़े, बस पढ़े भीमराव आम्बेडकर,
दुनिया में सबसे ज्यादा, हर अस्पताल में
जगह दिलाई सब प्राणी को,
साथ बैठ खाएंगे, साथ-साथ पूजा करेंगे।

किया संविधान का निर्माण,
दिलाया सबको अपना अधिकार
अपने संवैधानिक अधिकार से हर महिला,
करती है सब जगह नौकरी।

बचती है मासूम कईं घरेलू हिंसा से,
संविधान के अधिकार से मिला सबको
अपना अधिकार पढ़ना हो या शादी की हो बात,
मिला मुझे संविधान का अधिकार।

याद रखना उस बालक का सपना,
हमें भी पढ़ना है और बढ़ना है।
जंग में नाम रोशन करना है,
देश को सदा आगे बढ़ाना है॥