ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता….
कामिनी जब बनी थी दामिनी,
तब वो सृष्टि को बदल डाली।
काली बनी थी झांसी की रानी,
झुकी नहीं, मौत को गले लगाया।
सावित्री ने यमराज को हराया,
वरदान से पति को बचाया।
सहनशीलता की मूर्ति तू रमणी,
पति के साथ वन में रही तू रमणी।
उर्मिला ने भवन में ही त्यागा सब सुख,
जब लक्ष्मण ने भ्राता के संग सहा दु:ख।
इंदिरा गांधी बनीं प्रधानमंत्री प्रथम,
प्रतिभा पाटिल बनीं राष्ट्रपति प्रथम।
अंतरिक्ष में कल्पना लहराई परचम,
नौ स्पेस वॉक की सुनिता विलियम्स।
बछेंद्री पाल प्रथम पर्वतारोही बनीं,
अरुणिमा पहली दिव्यांग पर्वतारोही बनीं।
‘आपरेशन सिन्दूर’ भी जब सफल रहा,
कमांडर व्योमिका-सोफिया का साथ रहा।
मेरे घर की शानो-शौकत तू अंगना,
तू नहीं, तो रौनक नहीं है मेरे अंगना।
बस नारी का गहना ही है सम्मान,
भूलकर भी न करो इनका अपमान।
अगर दिल से खुश हो जाए वनिता,
घर-आँगन को स्वर्ग बना दे वनिता।
बच्चों को प्यार से पालती ये प्रमदा,
उनमें अपना संस्कार डालती ये वामा।
नारी को तुम कभी न समझो कमज़ोर,
ठान ले, तो हर क्षेत्र में परचम लहराए पुरजोर॥
परिचय-कुमारी ममता साहित्य जगत में ‘ममता सिंह’ के नाम से संवेदनशील लेखिका एवं भजन गायिका के नाते सक्रिय हैं। जन्म १० जनवरी १९७६ को उत्तर प्रदेश के बकईनिया (गाजीपुर) में हुआ है। वर्तमान में झारखंड राज्य के महुदा (जिला धनबाद) में निवास, जबकि स्थायी पता वारिसलीगंज (बिहार) में है। उन्होंने बी.एस-सी. (वनस्पति शास्त्र), एम.ए. (साहित्य), बी.एड. और पीजीडीआरडी की उच्च शिक्षा प्राप्त की है, साथ ही सी-टेट. एवं एस-टेट. (बिहार) उत्तीर्ण हैं। वर्तमान में लखीसराय जिले (बिहार) में कृषि विभाग में कार्यरत ममता सिंह को हिन्दी और भोजपुरी भाषा का अच्छा ज्ञान है। साहित्य के प्रति गहरी रुचि होने से काव्य गोष्ठियों में सक्रिय उपस्थिति देकर कविता पाठ करती हैं। भजन गायन में भी निपुण हैं और यू-ट्यूब के माध्यम से श्रोताओं तक पहुँचाती हैं। इनकी लेखन विधा- कविता, निबंध और भजन प्रमुख हैं। उनकी रचनाएँ अनेक पत्र-पत्रिका सहित अन्य मंचों पर प्रकाशित हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य समाज में फैली बुराइयों को दूर करना, नैतिक मूल्यों को स्थापित करना और विचारों को जन-जन तक पहुँचाना है। वे रामधारी सिंह दिनकर, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा तथा सुभद्रा कुमारी चौहान को प्रिय लेखक मानती हैं। उनके प्रेरणापुंज चरित्र में महात्मा गांधी, मीराबाई और इंदिरा गांधी शामिल हैं। देश और हिन्दी भाषा के प्रति उनके विचार अत्यंत स्पष्ट हैं। देशहित के लिए समर्पित व्यक्तित्व के रूप में आप साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में निरंतर सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास कर रही हैं। वे मानती हैं, कि- “हिन्दी हमारी पहचान और धरोहर है, जिसका व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए।”