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परिवर्तन हो संविधान में

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक….

संविधान पर बहस चल रही,
चलो बताओ तुम सब आज
किसने नियम बनाए इसके,
कैसे चलता इसका काज ?

समय देखते नियम बना था,
हित जिसमें लोगों का हो
जन-मत ने भी मान लिया था,
भला लगा जो लोक हित हो।

पर यह क्या हो रहा आज है,
जिसकी बनती है सरकार
अपने हित करते परिवर्तन,
जनता से नहीं है सरोकार।

जनता भी अब बदल गई है,
नहीं होना उसको परेशान
सदा याद अधिकार दिलाते,
दायित्वों का नहीं उन्हें है ध्यान।

परिवर्तन हो संविधान में,
अब है बहुत ज़रूरी काम।
नियम और क़ानून बने जो,
वह सब हो जनता के नाम॥