सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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संक्रांति मनाते हैं,
दिनकर-पूजा कर
भोग को लगाते हैं।
हर प्रांत मनाते हैं,
तिल, गुड़, मूँगफली
सब मिल कर खाते हैं।
ये नई उमंगें हैं,
आसमान भर में
उड़ रही पतंगें हैं।
ये बहुत लुभाती हैं,
बड़ी और छोटी
मन को सब भाती हैं।
मन करता उड़ जाऊँ,
संग साथ इनके
हिल-मिल कर कुछ गाऊँ॥