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बिजी है फोन

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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आवाज आती है, ट्रिन ट्रिन ट्रिन,
घंटी बजती है, फोन बिजी है
पता चलता है, इंसान बिजी है,
यही फैशन है, फोन बिजी है।

बात नहीं करना, मन नहीं है,
दिखावा करना, फोन बिजी है
जरुरत हो तो, हर वक्त हाजिर है,
दूसरों की जरूरत, फोन बिजी है।

बातों को टालना, नेटवर्क नहीं है,
जोर से बोलना, सुनना नहीं है
आउट आफ एरिया, नेटवर्क नहीं है,
थोड़ी देर में काल करें, फोन बिजी है।

फोन आसान है, इंसान बिजी है,
दुनिया सिमट गई, फोन बिजी है
कभी मोबाइल ही, आफत बन जाता है,
जब बीच रास्ते में, छिन जाता है।

जब मोबाइल से डेटा, हैक हो जाता है,
मोबाइल ही हमारा, दुश्मन बन जाता है।
संदेश आता है “राशि निकाल ली गई है”,
सिर अपना धुनें, जब कंगाल बन जाते हैं॥