बबिता कुमावत
सीकर (राजस्थान)
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शूरवीर भारतीय सेना (विजय दिवस विशेष)….
“पहले भारत, मैं बाद में”,
यह शपथ हर समय दोहराता है
उन शूरवीरों को सलाम,
तिरंगा जिनकी पहचान है।
जिनकी पूजा है शहादत,
जिससे सुरक्षित हिंदुस्तान है
जो हर समय कर्तव्य निभाते,
गोली में देशभक्ति गीत सुनते हैं।
मिट्टी की खुशबू, माँ ममता छोड़,
सीमा पर मुस्कान सजाते हैं।
जहां हिम शिखर की छाया में,
सबकी साँसें कांप जाती है।
वहां भारत माँ का वीर जवान,
धड़काता अपना साहस है
रेगिस्तान की तपती रेत में भी,
अडिग जमे हुए रहते हैं।
सागर की उफनती लहरों में भी,
भारत के प्रहरी बन जाते हैं
भारत माँ की जय जयकार को,
हर साँस में बसा लेते हैं।
हम चैन से सो सकें इसलिए,
खुद नींद से भी युद्ध करते हैं।
कभी नहीं वो हैं डरते,
जो जीवन न्योछावर कर अमर हो जाते हैं॥