हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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विश्व में चल रही उथल-पुथल,
सब अपने-आपको
श्रेष्ठ बताने में लगे हैं,
पर भारत आज भी मैत्री भाव बढ़ा रहा है।
हमने हाथ बढ़ाना सीखा है,
दूसरों से उनका हक नहीं छीनना सीखा
जो अभिमानी हैं, उन्हें पता नहीं,
यह भारत आज भी मैत्री भाव बढ़ा रहा है।
शक्तिशाली बने राष्ट्रों में,
आपसी कुंठा व ईर्ष्या भाव है
वह जल रहे अपनी अति महत्वाकांक्षाओं में,
पर भारत आज भी बढ़ा रहा मैत्री भाव है।
हिंसा, मार-काट, युद्ध कोई समाधान नहीं होता,
अहिंसा, समन्वय और एकजुटता सहयोग का बल बड़ा होता है।
जो जलते हैं अपनी ही अग्नि में, उनका कोई भविष्य नहीं होता,
यह तो भारत है, जो विश्व में मैत्री भाव बढ़ा रहा है॥