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महाभारत कालीन महिलाओं के शौर्य, द्वंद एवं प्रतिरोध पर हुई परिचर्चा

भोपाल (मप्र)।

अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच के स्थापना दिवस व ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के विशिष्ट अवसर पर आभासी माध्यम से आयोजन किया गया, जिसमें मंच की प्रतिबद्ध महिला सदस्यों (सुश्री मधुलिका सक्सेना, सुश्री नीलिमा मिश्रा, सुश्री अनिता ‘रश्मि’ और डॉ.अंजू क्वात्रा) को ‘महिला रत्न सम्मान’ से विभूषित किया गया। साथ ही ‘महाभारत कालीन महिलाएँ : शौर्य, द्वंद्व और प्रतिरोध’ विषय पर परिचर्चा कराई गई।
परिचर्चा में पिट्सबर्ग से ‘सेतु’ के संपादक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने महाभारत काल की कुछ हद तक गुमनाम पात्र कृपी की चर्चा करते हुए उनके जीवन द्वंद्व पर विचार प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि इंडिया नेट बुक्स के अध्यक्ष व साहित्यकार डॉ. संजीव कुमार ने महाभारत काल के प्रसिद्ध चरित्र ‘गांधारी’ के बारे में बोलते हुए उनकी पतिव्रता छवि के साथ उनके द्वारा लिए गए कुछ गलत निर्णयों के बारे में बताया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. नीलिमा रंजन ने महाभारत की शौर्य, प्रतिरोध और प्रतिशोध से भरी पात्र अम्बा-शिखंडी की कुछ अनसुनी चारित्रिक विशेषताओं को बताया। सारस्वत अतिथि डॉ. विनीता राहुरिकर ने महाभारत की प्रमुख पात्र ‘द्रौपदी’ से जुड़ी प्रचलित धारणाओं और कहानियों को नकारते हुए उनकी विद्वता, न्याय, नैतिकता, धीरता, साहस, वीरता और दृढ़ता से भरे व्यक्तित्व का चित्रण प्रस्तुत करते हुए उन्हें पाँचों पतियों को एकता के सूत्र में बांधने वाली विवेकशील महिला के रूप में प्रस्तुत किया।
सुश्री नविता जौहरी ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। स्वागत वक्तव्य देते हुए मंच की संस्थापक अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने कहा कि इन दिनों प्रचुर मात्रा में महाभारत और रामायण कालीन चरित्र पर साहित्यकारों की कलम चल रही है, लेकिन इन विषयों पर लिखते हुए बहुत सावधानी बरतनी चाहिए ताकि मूल कथा से भटके न और फिक्शन इतना अधिक न हो कि कथा नया रूप ले ले। फिर वही फिक्शन वाली कथा आगे चलकर जब नई पीढ़ी पढ़ेगी तो उसी को सच मान लेगी। ऐसे में हमारे पौराणिक ग्रंथों की उपादेयता कम हो जाएगी।
आयोजन में विद्या सिंह, संतोष बंसल, शकुंतला मित्तल, अर्चना पांडे और शैफालिका श्रीवास्तव सहित विभिन्न साहित्यकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्य बना दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था की निदेशक सुश्री महिमा श्रीवास्तव वर्मा ने किया। आभार उप्र इकाई अध्यक्ष डॉ.साधना वैद ने व्यक्त किया।