जनभाषा में न्याय…
पटना (बिहार)।
एडवोकेटस एसोसिएशन पटना उच्च न्यायालय के तत्वावधान में उच्च न्यायालय पटना के मुख्य न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू के स्वागत समारोह का आयोजन पटना उच्च न्यायालय के प्रांगण में ही हुआ। परंपरागत ढंग से हिंदीभाषी अधिवक्ताओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी में हो रहा था। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश से हिंदी में उद्बोधन की अपेक्षा कैसे की जा सकती थी, जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं, लेकिन सभी की उपस्थिति में मुख्य न्यायाधीश ने जनभावनाओं और राज्य की भाषा को सम्मान देते हुए अपना उद्बोधन भारत संघ की राजभाषा हिंदी में दिया, जिससे लोगों को आजादी के आनंद की अनुभूति हुई।
आयोजन में उपस्थित अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद (पटना उच्च न्यायालय) के मुताबिक उन्होंने अपने उद्बोधन में यह भी बोलना उचित समझा कि- जब मैं पटना उच्च न्यायालय आया, तब हमारे कुछ न्यायाधीश मित्र हमसे बोले कि यहाँ कुछ ऐसे भी अधिवक्ता हैं ,जो सिर्फ हिंदी में आवेदन दाखिल करते हैं और हिंदी में ही बहस करते हैं। यदि आप हिंदी ठीक से नहीं समझ पाते हैं, तब आपको कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए मैंने हिंदी सीखने एवं बोलने की कोशिश की और १ महीने के भीतर ही हिंदी सीख ली। अभी तक मुझे किसी हिंदी आवेदन को या हिंदी अनुलग्नक को समझने में कोई परेशानी नहीं हुई है। यदि मैं हिंदी का कोई शब्द ठीक से नहीं समझ पाता हूँ, तब अपने न्यायाधीश मित्र के सहयोग से उस शब्द को समझने की कोशिश करता हूँ और उसे समझ लेता हूँ।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के दायरे में रहकर अधिवक्ता को संघर्ष करना चाहिए, लेकिन संघर्ष का उद्देश्य संविधान और सत्य की जीत को सुनिश्चित करवाना होना चाहिए। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से अनुरोध किया कि जब आप न्यायालय में वकालत करने आते हैं, तो आपको अनर्गल चर्चाएं नहीं करनी चाहिए।
निश्चय ही मुख्य न्यायाधीश ने न्याय की अपेक्षा में आने वाले लोगों की आशाओं और उनकी भाषा को सम्मान देकर न्याय के मूल आधार एवं हिंदी में याचिका लगाने वाले और बहस करने वाले अधिवक्ताओं को सम्मानित किया है। उन्होंने देशवासियों के मन में जनभाषा में न्याय की आशा जगाई है।
(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुम्बई)