कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
************************************************
राम धाम के वैभव बसंती सतरंगी वैभव को नमन,
है नमन उन सद्गुरु के शिल्पी बंधन को शत-शत नमन
रामधाम में प्रकृति वासंती बरसते पुलकित प्रकृति लगने लगी,
हर मन में राम नाम की चेतना नहीं उमंगे हुलसने लगी,
आज हर प्राण में लहर उठा है
राम धाम के हर सद्गुरु राम भक्तों को शत-शत वंदन,
फिर आया चारों दिशाओं में राम नाम का लिए वसंत।
दुनिया के उज्जवल भविष्य का संदेश लाया है,
अब धरती के हर मानव के चिंतन चरित्र में परिवर्तन होना है
युग के युग बसंती राम भक्त शिल्पी सद्गुरु को सत सत वंदन है,
अब जन मानस में सनातन की मुस्कान है
अब लगता है हम अपने भारत के इंसान है,
जिसने भी राम धाम का अपमान किया
मुक्ति मिलेगी तभी उसको
जब जनमानस के मन से रामलाल धाम जाएंगे,
जाए सब मिल माँगें माफी राम लला की चौखट पर।
राम का मन है निर्मल कितना
कर देंगे सब को माफी,
राम भक्त के हे गुरुवर! हमको भी इस वसंत पर कर देना बसंती
संवेदन भर देना पतझड़ पीड़ित मानवता हित में,
सारा जग ए स्वस्थ हो गया,
नवयुग का अभिनंदन है
अब रामलाल के शिल्पी भक्तों को शत-शत बंधन है,
मन रहेगा शान रहेगा, उन हाथों का जिनके हाथ रामलाल के धाम गढ़े।
की जिसने राम धाम की कारीगरी,
उनकी गरिमा का मान रखेंगे,
आज समर्पित है उन भक्तों को मानस वसंती जीवन को
जिन्होंने भी इस युग में राम धाम का नया निर्माण किया,
आज नमन है शिल्पी के राम धाम के भक्तों को शत-शत बंधन है
उनको जो राम धाम की कारीगरी रच डाली है,
वंदन उन माँ को जिसने ऐसी शिल्पी को जन्म दे डाला
है बंधन उनको, जिसने राम लाला के शिल्पी को जन्म दिया,
सत्य सनातन का जय घोष दिशा दिशा में गूँजेगा
पवन पुत्र बैठ कांधे पर ले पताका जय श्रीराम बोलेंगे,
अब लगता है राणा हो या शिवाजी चाहे हो महाराणा प्रताप
हर-हर महादेव जिसने बोला था,
भगवा रंग फहराया है,
अब जा के भारत रंगा-रंग लगता है।
है सत्य सनातन की जय-जय कार,
मंद-मंद मुस्कान सूरज भी अब बोलेगा॥
