गोपाल मोहन मिश्र
दरभंगा (बिहार)
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हराया है तूफ़ानों को, मगर अब ये क्या तमाशा है,
हवा करती है जब हलचल, बदन ये कांप जाता है।
है सूरज रौशनी देता, सभी ये जानते तो हैं,
है आग दिल में बसी कितनी, न कोई भाँप पाता है।
है ताकत प्रेम में, पिघला दे पत्थर लोग कहते हैं,
पिघल जाता है जब पत्थर, जमाना तिलमिलाता है।
कहाँ से नफ़रतें आ के, घुली हैं उन फ़िजाओं में,
जहाँ पत्थर भी ईश्वर है, जहाँ गैया भी माता है।
चला जाएगा खुशबू लूटकर, हैं जानते सब फूल,
न जाने कैसे फिर भँवरा, कली को लूट पाता है।
फतिंगे यूँ तो दुनियाँ में हजारों रोज मरते हैं,
शमाँ पर जान जो देता, वही सच जान पाता है।
बने इंसान अणुओं के, जिन्हें यह तक नहीं मालूम,
क्यूँ ऐसे मूर्खों के सामने, तू सर झुकाता है।
दिवारें गिर रही हैं और छत की है बुरी हालत,
शहीदों का ये मंदिर है, यहाँ अब कौन आता है।
नहीं हूँ प्यार के काबिल तुम्हारे, जानता हूँ मैं,
मगर मुझसे कोई बेहतर, तुझे नजर भी नहीं आता है॥
परिचय–गोपाल मोहन मिश्र की जन्म तारीख २८ जुलाई १९५५ व जन्म स्थान मुजफ्फरपुर (बिहार)है। वर्तमान में आप लहेरिया सराय (दरभंगा,बिहार)में निवासरत हैं,जबकि स्थाई पता-ग्राम सोती सलेमपुर(जिला समस्तीपुर-बिहार)है। हिंदी,मैथिली तथा अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले बिहारवासी श्री मिश्र की पूर्ण शिक्षा स्नातकोत्तर है। कार्यक्षेत्र में सेवानिवृत्त(बैंक प्रबंधक)हैं। आपकी लेखन विधा-कहानी, लघुकथा,लेख एवं कविता है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। ब्लॉग पर भी भावनाएँ व्यक्त करने वाले श्री मिश्र की लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा है। इनके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक- फणीश्वरनाथ ‘रेणु’,रामधारी सिंह ‘दिनकर’, गोपाल दास ‘नीरज’, हरिवंश राय बच्चन एवं प्रेरणापुंज-फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शानदार नेतृत्व में बहुमुखी विकास और दुनियाभर में पहचान बना रहा है I हिंदी,हिंदू,हिंदुस्तान की प्रबल धारा बह रही हैI”