कुल पृष्ठ दर्शन : 13

विजय गाथा

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
************************************

शूरवीर भारतीय सेना (विजय दिवस विशेष)…

दुश्मनों का आत्मसमर्पण, हमारी सेना की कामयाबी के वह क्षण
आज अतीत का वह शौर्य है वही,
विजय गाथा बन हमारी नस-नस में दौड़ रहा है।

जीत भारत की वह ऐसी थी,
पूरी दुनिया जिसे देखती रह गई
शहीद हुए हजारों जवान अपने देश पर,
वही विजय गाथा, बन हमारी नस-नस में दौड़ रहा है।

युद्ध ज्यादा नहीं चला लेकिन
उसमें हमारे सैनिकों ने,
पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब दिया
ऐतिहासिक युद्ध में हमने नए मुल्क बांग्लादेश को जन्म दिया,
वही विजय गाथा बन हमारी नस-नस में दौड़ रहा।

भारत की शक्ति ने अखंडता के लिए हर बार युद्ध लड़ा,
देश के मूलभूत आदर्शों को ऊँचा किया
दुश्मनों ने हजारों हवाई हमले किए, पर हमारा सैनिक डरा नहीं,
वही विजय गाथा बन हमारी नस-नस में दौड़ रहा।

हम शन्ति, अहिंसा, भाईचारे के लिए समन्वयक की भूमिका निभाते हैं,
पर कोई हमसे तिरछी नजरों से दुश्मनी करता है
उसे अपने ढंग से ईंट का जबाब पत्थर से देना जानते हैं,
तभी तो विजय दिवस की यह विजय गाथा हमारी नस-नस में दौड़ रही है॥