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व्यंग्य रचनाओं ने कचोटने के साथ श्रोताओं का मन मोहा

दिल्ली।

राजधानी के प्रसिद्ध प्रेस क्लब में साहित्यिक, सामाजिक और प्रसारण जगत की हस्तियों के बीच व्यंग्य की महफिल सजी। यह कार्यक्रम संस्था चेतना इंडिया ने आयोजित किया, जिसमें रचनाकारों की व्यंग्य रचनाओं ने कचोटने के साथ श्रोताओं का मन मोह लिया।
इस अवसर पर चेतना इंडिया की अध्यक्ष चंद्रिका जोशी ने कहा कि नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना हमारा उद्देश्य है और निरंतर युवाओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं। रूपरेखा के अनुसार अगला कार्यक्रम शालेय बच्चों के साथ करेंगे। सुनील जैन ‘राही’, प्रदीप कुमार और अन्य पदाधिकारियों के साथ मिलकर हम आयोजन कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम का आरम्भ आगरा के प्रसिद्ध संगीतकार सुशील सरित ने सरस्वती वंदना ‘जीवन नदी कल- कल बहे ऐसा हमें आधार दे माँ’ के साथ किया। देर तक सोने वाली धाकड़ ‘जिज्जी’ के बड़े-बड़े सपनों, बिना कुछ किए महान बनने की इच्छा और जोड़-तोड़ से कविता रचने की कला पर रिंकल शर्मा की व्यंग्य रचना ने श्रोताओं का मन मोह लिया। ‘बुद्धिजीवी होता तो कविता सुनने क्यों आता ?’ जैसी सूक्ति ने खूब गुदगुदाया। कवि-कथाकार विवेक गौतम ने रचना ‘खरीदी हुई नींद’ सुनाई। उनकी अन्य रचनाओं में ‘दीवारों पर लिखने की कला’ और बदलते इतिहास के ज़िक्र ने भी गुदगुदाया। प्रसिद्ध व्यंग्यकार और आलोचक सुभाष चंदर ने चिर- परिचित अंदाज़ में नई रचना सुनाई। उन्होंने मंदिर में माँ काली के समक्ष बकरे की बलि, गाय हमारी माता है (दूध निकालने के लिए इंजेक्शन लगाने की विद्रूपता) पर करुणा, खरगोश का रोना – तीन दृश्यों के शब्द चित्रण के माध्यम से कई विसंगतियों और विद्रूपताओं पर करारा तंज किया।
चर्चित व्यंग्यकार श्रवण कुमार उर्मलिया ने अपनी रचना ‘ए मेरी भूतपूर्व प्रेमिका’ सुनाई। जाने-माने कवि-कथाकार रणविजय राव ने ‘हुई है वही जो राम रची राखा’ रचना से भ्रष्टाचार को जीवन में स्थिर मानने वाले लोगों की प्रवृत्ति पर कटाक्ष किया।
प्रसिद्ध व्यंग्यकार और व्यंग्य के उद्दंड विद्यार्थी ‘राही’ ने ‘रोज़ा’ रचना सुनाई। कर्म को ही धर्म समझने वाले व्यक्तियों के बारे में यह रचना विसंगतियों पर करारा प्रहार करती है।
चेतना इंडिया के संस्थापक दुर्ग विजय सिंह दीप ने अपना गीत ‘आओ मिलकर बेचें देश’ सुनाया।
कार्यक्रम का संचालन सिद्धार्थ ने किया। विजय लक्ष्मी कासोटिया ने सभी को धन्यवाद दिया।