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शान्ति स्थापित, लोक मंगल

सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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युद्ध और शांति: जरूरी क्या ?..

युद्ध संहार सदा सर्वदा,
होती न शान्ति, परिणाम भयावह
युद्ध वैमनस्य, विरोध परिणाम,
युद्ध विनाश, विनाश भयावह।

मौत का तांडव दुरूह विचार,
बेमौत तांडव,निरीह विचार
चहुं ओर लोथ संकट संचार,
कहे मानव, शक्ति प्रचंड विचार।

गोद सूनी आँखें नम सिंदूर मिटा,
पूछें, मासूम साया जो छूटा
अपनो की माला, मोती टूटा,
अमर रहे, पर जग छूटा।

सृष्टि रचयिता सर्वत्र प्रेम व्याप्त,
शान्ति,नेह ,सद्भाव भू-व्योम व्याप्त
सुवासित,सुशोभित अहिंसा व्याप्त,
क्रोध-क्रोधी दिन-चार व्याप्त।

इतिहास गवाह, रण संहारक,
मदहोश हठ,ग्लानि दायक
निर्दोष, रक्त रंजित भू संहारक,
समस्त चराचर तड़प भयानक।

ख्याति, सूरमा, साहसी योद्धा,
किस विधि लहुलुहान जो, योद्धा
विह्वल वीर, पीड़ा जो पूछें,
मातृभूमि पूर्व, निज जननी पूछें।

युद्ध प्रत्युत्तर शान्ति सहारे,
अहो, शान्ति स्थापित, लोक सहारे
शक्ति प्रदर्शन, भ्रम अहम् गहरे,
लोक मंगल युद्ध डिगाएं॥

परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।